गर्भाशय क्या है? जानें सम्बंधित समस्याएं और इलाज | Uterus in Hindi

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Written by Hexahealth Care Team, last updated on 21 July 2023| min read
गर्भाशय क्या है? जानें सम्बंधित समस्याएं और इलाज | Uterus in Hindi

Quick Summary

  • गर्भाशय एक महिला प्रजनन अंग है जो श्रोणि में स्थित होता है। यह गर्भावस्था के दौरान विकासशील भ्रूण के पोषण और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। यह एक मांसपेशीय अंग है जो जो स्त्री प्रजनन काल में माहवारी, गर्भधारणा,और प्रसव के दौरान अहम भूमिका निभाता है।
  • एक स्त्री के जीवन काल में उसके शरीर में काफी सारे बदलाव होते है। इन बदलावों का प्रभाव गर्भाशय पर भी होता है, जो बीमारी का कारण बन सकता है। इस लेख में हम गर्भाशय का मतलब, उसकी संरचना, कार्य, बीमारियां, लक्षण, रोग निदान और इसके इलाज से संबंधित सभी जानकारी जानेंगे।

गर्भाशय एक महिला प्रजनन अंग है जो श्रोणि में स्थित होता है। यह गर्भावस्था के दौरान विकासशील भ्रूण के पोषण और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है। यह एक मांसपेशीय अंग है जो जो स्त्री प्रजनन काल में माहवारी, गर्भधारणा,और प्रसव के दौरान अहम भूमिका निभाता है।

एक स्त्री के जीवन काल में उसके शरीर में काफी सारे बदलाव होते है। इन बदलावों का प्रभाव गर्भाशय पर भी होता है, जो बीमारी का कारण बन सकता है। इस लेख में हम गर्भाशय का मतलब, उसकी संरचना, कार्य, बीमारियां, लक्षण, रोग निदान और इसके इलाज से संबंधित सभी जानकारी जानेंगे।

गर्भाशय का अर्थ

यूटरस का हिंदी में अर्थ गर्भाशय है। यह स्त्री जननांग है जो हर महिला या लड़की में जन्म से होता है।
गर्भाशय की आकृति नाशपाती फल के आकार की होती है। 

यहाँ एक फलित अंडा गर्भावस्था के दौरान प्रत्यारोपित होता है। इसी गर्भाशय में बच्चे के जन्म तक विकास होता है। यह महिलाओं के माहवारी के समय भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गर्भाशय का मतलब जानने के बाद अब जानेंगे इसकी संरचना।

गर्भाशय की संरचना

गर्भाशय के ऊपरी हिस्से में दो नलिका हैं, जिसे डिंबवाही नलिका कहते है। यह निचले भाग में आपके गर्भाशय ग्रीवा से जुड़ता है, जो योनि प्रसव के दौरान खुलता और पतला होता है। गर्भाशय की लंबाई ३ इंच और सबसे चौड़े हिस्से में २ इंच मोटा है। गर्भाशय का वजन लगभग २८.३५ ग्रामस होता है।

यूटरस क्या है, यह समझने के लिए उसकी संरचना को सटीक तरीके से समझना जरुरी है। महिला के गर्भाशय की संरचना चार खंड में विभाजित की गई हैं:

  1. गर्भाशय का बुध्न - यह गर्भाशय का सबसे ऊपरी और चौड़ा हिस्सा है, जो गर्भाशय को डिंबवाही नलिका से जोड़ता है।

  2. गर्भाशय का कोष - यह स्त्री के गर्भाशय का मुख्य भाग है, जो डिंबवाही नलिका से शुरू होता है।

  3. गर्भाशय का इस्थमस - यहगर्भाशय और गर्भाशय ग्रीवा के बीच का गर्दन क्षेत्र है।

  4. गर्भाशय ग्रीवा - यह गर्भाशय का नीचे का हिस्सा है, जो योनि में खुलता है।

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गर्भाशय के कार्य

गर्भाशय का मतलब केवल प्रजनन अंग नही है, इसके अलावा भी यह अंग स्त्री के स्वास्थ्य के कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गर्भाशय के तीन मुख्य कार्य हैं:

  1. प्रजनन क्षमता - गर्भधारणा के दौरान भ्रूण का आरोपण गर्भाशय में  होता है जहां भ्रूण शिशु के रूप में विकास होता है। 

  2. माहवारी - गर्भाशय अस्तर वह जगह है जहां माहवारी  के दौरान रक्त और ऊतक तैयार होते है।

  3. गर्भावस्था - गर्भावस्था के दौरान गर्भ में पल रहे भ्रूण के विकास के लिए गर्भाशय बड़ा होता है। साथ में जब बच्चा योनि द्वारा जन्म लेता है तब गर्भाशय की मांसपेशियां संकुचित होकर बच्चे को योनि से बाहर धकेलने में मदद करती है।

गर्भाशय के विकार

कई गर्भाशय से जुड़ी बीमारियां स्त्री को हो सकती है। कुछ आम बीमारियां हैं: 

  1. गर्भाशय पॉलीप्स - यह गर्भाशय के अस्तर में  होनेवाली ऊतक वृद्धि है।

  2. गर्भाशय का कर्क रोग - यह गर्भाशय का कर्क, जैसे एंडोमेट्रियल कैंसर या गर्भाशय सार्कोमा। 

  3. श्रोणि का सूजन - यह प्रजनन अंगों का संक्रमण से होता है, जो योनि, ग्रीवा से होते हुए गर्भाशय को ग्रसित कर सकता है। 

  4. गर्भाशय का स्थानच्युति - अपने स्थान से भ्रंशगर्भाशय का मतलब, गर्भाशय अपनी जगह से हट कर नीचे की ओर खिसक गया है। 

  5. बांझपन - इस स्थिति में स्त्री को गर्भ धारण करने में विफलता आती है।

  6. एंडोमेट्रियोसिस - इस स्थिति में गर्भाशय के अस्तर के परत गर्भाशय के अलावा अन्य जगहों पर बढ़ने लगता है। 

  7. गर्भाशय फाइब्रॉएड - यह गर्भाशय में होनेवाली छोटी, कैंसर रहित  गांठे है। 

  8. गर्भाशय ग्रीवा का कर्क रोग - यह कर्क रोग गर्भाशय ग्रीवा में शुरू होता है, जो गर्भाशय का निचला, संकरा सिरा होता है।

  9. डिम्बग्रंथि का कर्क रोग - यह कर्क रोग गर्भाशय के दोनो तरफ स्थित अंडाशय को ग्रसित करता हैं।

गर्भाशय के रोग के लक्षण

यूटरस क्या होता है, ये जानना इसलिए जरूरी है, ताकि महिलाएं इन लक्षणों को लेकर जागरूक हो और सही समय पर उन्हें इलाज मिले। नीचे दिए गए लक्षण गर्भाशय से जुड़े बीमारियो को इंगित करते है। जैसे:

  1. माहवारी के साथ समस्याएं (जैसे दर्द, अनियमितता और सफेद पानी)

  2. अनियमित रक्तस्राव (जहा रक्तस्राव नियमित से अधिक दिनों तक बना रहता है)

  3. पेडू में दर्द (जो सूजन या गर्भाशय के मांसपेशियों के सिकुड़ने से होता है)

  4. अनियमित योनि स्राव (संक्रमण के दौरान योनि से रक्त या सफेद पानी स्राव होता है)

  5. पेशाब करने में दर्द (जो सूजन या संक्रमण के वजह से होता है)

  6. गर्भधारणा में दिक्कतें (गर्भाशय से जुडी समस्या अक्सर गर्भ रुकने में बाधा बनती है)

गर्भाशय विकारों का निदान

गर्भाशय का मतलब है बच्चेदानी, जो माहवारी और गर्भधारणा के दौरान महत्त्वपूर्ण कार्य करता है। इसीलिए गर्भाशय से जुड़ी बीमारियों का सही समय पर निदान और चिकित्सा करना आवश्यक है। आम तौर पर जांच के कारण है: 

  1. कैंसर की जांच

  2. गर्भावस्था की निगरानी

  3. प्रजनन संबंधी समस्याओं का निदान

गर्भाशय से जुड़े कुछ आम नैदानिक परीक्षण हैं:

  1. श्रोणि परीक्षा - इस परीक्षा में परिणित वैद्य आपके गर्भाशय, गर्भाशय ग्रीवा, योनि, अंडाशय और अन्य प्रजनन अंगों की परीक्षा करते है। 

  2. अल्ट्रासाउंड - यह ध्वनि तरंगों के माध्यम से गर्भाशय के अंदर की तस्वीर बनाता है। इस तस्वीर से अंदर के अंगो की स्थिति पता चलती है।

  3. गर्भाशयदर्शन (हिस्टेरोस्कोपी) - इसमें स्वास्थ्य सेवा प्रदाता गर्भाशय के अंदर तस्वीर लेने के लिए एक पतली नली को आपके योनि द्वारा गर्भाशय में डालते है। यह परीक्षा अक्सर डिंबवाही नलिका के रुकावट देखने के लिए की जाती है।

  4. एमआरआई - आपके श्रोणि में आपके गर्भाशय और अन्य प्रजनन अंगों की तस्वीरें लेने के लिए चुंबकीय और रेडियो तरंगों का उपयोग करता है।

गर्भाशय विकारों के लिए उपचार

महिलाओं को गर्भाशय से जुड़ी कही सारे बीमारियां हो सकती है। हर रोग का उपचार भिन्न होता है।  हर एक बीमारी का इलाज रोग का प्रकार, रोग का चरण और लक्षणों की गंभीरता पर निर्भर करता है। यहां कुछ आम बीमारियां और उनके इलाज के कुछ तरीके दिए गए है।

दवाईयां

  1. गर्भाशय फाइब्रॉएड का इलाज ओटीसी, याने के (बिना परछे के मेडिकल दुकान में मिलानेवाली दवा) दर्द दवाइयां जैसे एसिटामिनोफेन और इबुप्रोफेन जैसी दवाओं के साथ किया जाता है।

  2. अत्यधिक रक्तस्राव से एनीमिया होने पर आयरन की खुराक (सप्लीमेंट्स) दी जाती हैं।

  3. गर्भनिरोधक गोलियों का उपयोग फाइब्रॉएड के लक्षण जैसे माहवारी और माहवारी के दौरान भारी रक्तस्राव से राहत के  लिए दिया जाता है। 

  4. गर्भाशय के कर्क रोग में रसायन चिकित्सा (कीमोथेरेपी) कि दवाईयां दी जाती है। यह दवाईयां कैंसर ग्रसित कोशिकाओं को नष्ट करती है।

  5. एंडोमेट्रियोसिस दर्द से राहत के लिए ओवर-द-काउंटर दवा या एनएसएआईडी (बिना स्टेरॉइड के सुझान रहित दवा ) दर्द से राहत देते है।

शल्य चिकित्सा

  1. मायोमेक्टोमी - यह एक शल्य चिकित्सा है जहा गर्भाशय को बिना नुकसान पहुंचाए फाइब्रॉएड की गांठ को हटा दिया जाता है।

  2. हिस्टेरोस्कोपी -इस प्रक्रिया में योनि और गर्भाशय ग्रीवा के माध्यम से और गर्भाशय में एक स्कोप (एक पतली, लचीली ट्यूब जैसी उपकरण) डालकर फाइब्रॉएड को हटाया जाता है।

  3. लैपरोटॉमी प्रक्रिया - यहाँ आपके पेट में एक चीरा लगाकर, फाइब्रॉएड को हटा दिया जाता है।

गर्भाशय के बीमारियों का रोकथाम

गर्भाशय का मतलब जानने के साथ हर महिला को इससे जुड़ी बीमारियों को रोकथाम करने के बारे में भी जानकारी होना आवश्यक है। वैसे तो गर्भाशय से जुड़ी हर बीमारी को रोका नहीं जा सकता। पर कुछ एतियात बरतने से जल्दी निदान और इलाज किया जा सकता है। जैसे:

  1. नियमित जांच - किसी भी संभावित गर्भाशय संबंधी समस्याओं का जल्द पता लगाने और उनका तुरंत समाधान करने के लिए नियमित स्त्री रोग संबंधी जांच का समय निर्धारित करें। इन जांचों में गर्भाशय के स्वास्थ्य का मूल्यांकन करने के लिए पैल्विक परीक्षण, पैप परीक्षण और अल्ट्रासाउंड शामिल हो सकते हैं।

  2. सुरक्षित यौन संबंध - सुरक्षित यौन व्यवहार, जैसे कंडोम का उपयोग करना और यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) के लिए परीक्षण करवाना, उन संक्रमणों को रोकने में मदद कर सकता है जो गर्भाशय संबंधी बीमारियों का कारण बन सकते हैं, जैसे कि पेल्विक सूजन रोग (पीआईडी)।

  3. स्वस्थ वजन बनाए रखना - संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के माध्यम से स्वस्थ वजन बनाए रखने से गर्भाशय संबंधी स्थितियों, जैसे एंडोमेट्रियल कैंसर और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) का खतरा कम हो सकता है, जो गर्भाशय को प्रभावित कर सकते हैं।

  4. हार्मोनल संतुलन - हार्मोनल असंतुलन गर्भाशय संबंधी विकारों में योगदान कर सकता है। स्वस्थ जीवनशैली विकल्पों, तनाव प्रबंधन और, यदि आवश्यक हो, उचित चिकित्सा हस्तक्षेप के माध्यम से हार्मोनल संतुलन बनाए रखने से गर्भाशय फाइब्रॉएड और एंडोमेट्रियोसिस जैसी कुछ गर्भाशय स्थितियों को रोकने में मदद मिल सकती है।

  5. तंबाकू और अत्यधिक शराब के सेवन से परहेज - धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन को गर्भाशय के कैंसर सहित गर्भाशय संबंधी बीमारियों के बढ़ते खतरे से जोड़ा गया है। धूम्रपान छोड़ना और कम मात्रा में शराब पीना या पूरी तरह से परहेज करने से इस जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

निष्कर्ष

गर्भाशय स्त्री के जीवन में माहवारी, गर्भावस्था और प्रजनन क्षमता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्त्री शरीर के अधिकांश अंगों की तरह, गर्भाशय भी ऐसे रोग और संक्रमण विकसित कर सकता है जिनके लिए चिकित्सा उपचार की आवश्यकता होती है।

इस लेख से गर्भाशय क्या है, उससे जुड़ी सारी बीमारियां, लक्षण, इलाज और रोकथाम के बारे में आप जान गए है। यदि आपको और जानकारी चाहिए, तो HexaHealth के प्रदाता को फोन करें। इनसे  जुड़े परिणित वैद्य और उनका समूह आपकी हर एक प्रश्न का समाधानकर उत्तर देंगे।     

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  1. Liver

अधिकतर पूछे जाने वाले सवाल

गर्भाशय एक स्त्री में पाए जानेवाला जननांग है जो मूत्राशय और मलाशय के बीच श्रोणि में स्थित होता है। गर्भाशय का मुख्य कार्य जन्म से पहले गर्भ में बढ़ रहे भ्रूण को पोषण देना है।

उत्रसंधि या हिस्टेरेक्टॉमी एक शल्य प्रक्रिया है जिसमे गर्भाशय को निकाला जाता है। इस शल्य प्रक्रिया के बाद, महिला गर्भवती नहीं हो सकती नही उसे माहवारी  रहता है। इस शल्य प्रक्रिया का कारण असामान्य रक्तस्राव, गर्भाशय नीचे खिसक जाना, गांठ और कर्क रोग शामिल हैं।

गर्भाशय का मतलब स्त्री शरीर का वो अंग है जहा उसका भ्रूण, शिशु के रूप में विकसित होता है। यह अंग अलग नामो से जाना जाता है। गर्भाशय का मतलब बोली भाषा में कोख या गर्भ है।

यूटरस क्या होता है इससे ज्यादा ये जानना जरुरी है के, गर्भाशय क्यों महत्वपूर्ण है । 

  1. फलित बीज (भ्रूण) का प्रत्यारोपण  गर्भाशय में होता है।

  2. यह अंग भ्रूण को बढ़ने के लिए सुरक्षा और पोषण प्रदान करता है।

  3. यह अंग माहवारी  के दौरान रक्त और ऊतक तैयार करता है।

 गर्भाशय का मतलब स्त्री शरीर में श्रोणी में,मलाशाय और मूत्राशय के बीच में स्थित अंग है। यह मांसपेशी से बना संरचनात्मक अंग उदर श्रोणि कि मध्य रेखा में स्थित है। इसमें तीन परतें होती हैं: 

  1. अंतरतम परत (एंडोमेट्रियम)

  2. मध्यम परत (मायोमेट्रियम) 

  3. सबसे बाहरी परत (पेरिमेट्रियम )

इसके अलावा गर्भाशय के चार भाग होते है, फंडस, कॉर्पस, इस्थमस और गर्भाशय ग्रीवा।

एक स्त्री के शरीर में यूटरस क्या होता है, यह हम जानते है। पर ये जानना भी जरुरी है, यह गर्भाशय कही सारी बीमारियों से ग्रसित हो सकता है, जिनके लक्षण अलग अलग हो सकते है। आम तौर पर गर्भाशय की समस्याओं के लक्षण 

  1. श्रोणी में या पेट में दर्द का उठना

  2. माहवारी से जुड़ी समस्या

  3. माहवारी में अतिरक्तस्राव

  4. अनियमित रक्तस्राव

  5. अनियमित योनि द्रव या सफेद पानी

  6. पेशाब करते वक्त दर्द उठना

  7. गर्भधारणा न होना

गर्भाशय की समस्याओं की उपचार नीचे दिए तरीको से की जा सकती है।

  1. दर्द की दवा

  2. हार्मोन की दवा

  3. शल्य चिकित्सा

गर्भाशय की बढ़ने की शुरुआत यौवन के शुरू होने के साथ होती है। इस समय में गर्भाशय के आयामों में वृद्धि और एंडोमेट्रियम की परत मोटी होती है।

साथ में गर्भाशय की आकृति नलीदार आकार से नाशपाती के आकार में आने लगती है। यौवन के दौरान शरीर में बढ़ती सेक्स स्टेरॉयड की सांद्रता गर्भाशय के विकास और आकार में परिवर्तन लाता है।

गर्भाशय में तीन परतें होती हैं:

  1. परिधि: सबसे बाहरी, सुरक्षात्मक परत।

  2. मायोमेट्रियम: अत्यधिक मांसपेशीवाली मध्य परत। यह वो परत है जो गर्भावस्था के दौरान फैलता है और प्रसव के दौरान बच्चे को योनि द्वारा बाहर धकेलने के लिए सिकुड़ता है।

  3. एंडोमेट्रियम:  यह गर्भाशय की अंदरूनी परत है। यह परत माहवारी के दौरान आपके गर्भाशय से गिर जाती है, जिसे रक्तस्राव रूप में देखा जाता है।

गर्भावस्था के दौरान शिशु के संपूर्ण विकास के लिए कई हार्मोन की जरूरत होती है। प्रमुख हार्मोन हैं। 

  1. ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोपिन हार्मोन (एचसीजी) - यह हार्मोन गर्भावस्था के दौरान विशेष रूप से प्लेसेंटा में बनता है। पहली तिमाही के दौरान मां के रक्त और मूत्र में काफी ज्यादा मात्रा में पाए जाने वाला यह हार्मोन, मतली और उल्टी का कारण हैं।

  2. ह्यूमन प्लेसेंटल लैक्टोजन - इसे  ह्यूमन कोरियोनिक सोमैटोमैमोट्रोपिन भी कहा जाता है। यह प्लेसेंटा द्वारा बनता है और भ्रूण को पोषण देता है। साथ में यह स्तनपान के लिए मां के स्तनों में दुग्ध ग्रंथियों को उत्तेजित भी करता है।

  3. एस्ट्रोजेन - अंडाशय में बननेवाला यह हार्मोन महिला यौन लक्षणों को विकसित करने में मदद करता है। गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ गर्भावस्था को बनाए रखने में मदद करता है।

  4. प्रोजेस्टेरोन - यह हार्मोन गर्भावस्था के दौरान अंडाशय और प्लेसेंटा द्वारा बनाया जाता है, जो निषेचित अंडे के आरोपण के लिए गर्भाशय की परत को मोटा करने को उत्तेजित करता है।

गर्भाशय का मतलब ही है, स्त्री के प्रजनन कार्य का महत्वपूर्ण अंग। गर्भाशय के तीन मुख्य कार्य हैं:

  1. गर्भदान होने के बाद में निषेचित अंडे (भ्रूण) का आरोपण गर्भाशय की परत में  होता है।

  2. गर्भावस्था के दौरान भ्रूण को सही पोषण देकर उसे शिशु रूप में विकसित करने में गर्भाशय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

  3. प्रसव के दौरान गर्भाशय के पेशियां सिकुड़कर बच्चे को योनि द्वारा बाहर निकलने में मदद करता है।

  4. माहवारी के समय, गर्भाशय का अंदरूनी अस्तर रक्त और ऊतक बनाता हैं। जो मासिक रक्तस्राव बनकर बाहर निकलता है।

गर्भाशय का मतलब वो स्त्री प्रजनन अंग है जो आरोपण, गर्भधारण, माहवारी  जैसे प्रक्रियाओं के लिए जिम्मेदार है। एक गर्भाशय तीन परत का बना होता है, जिसमे एंडोमेट्रियम, मायोमेट्रियम, और परिधि शामिल होते है।

गर्भाशय के मुख्य कार्य भ्रूण का प्रत्यारोपण, भ्रूण को सुरक्षा एवं पोषण देना, और माहवारी के चक्र को बनाए रखना है।

अधिकांश महिलाएं उत्रसंधि से लगभग चार से छह सप्ताह में ठीक हो जाते हैं। आपकी पूर्वव्रत आरोग्य प्राप्ति इस बात पर निर्भर करती है कि आपको किस प्रकार की उत्रसंधि हुई थी और कैसे की गई थी। योनि और लैप्रोस्कोपिक उत्रसंधि से उभरने में पेट के उत्रसंधि से उभरने में कम समय लगता है।

इस दौरान आपको अपने शरीर में 

  1. चीरा लगी जगह पर दर्द या खुजली महसूस हो सकती है

  2. आपकी माहवारी रुक जायेगी

  3. कभी-कभी, आपको फूलापन महसूस हो सकता है

  4. शल्य चिकित्सा के बाद, चार से छह सप्ताह तक योनि से हल्का रक्तस्राव हो सकता है

  5. लगभग चार सप्ताह तक चीरा लगाने की जगह  पर खिंचाव या असुविधा महसूस हो सकता हैं

  6. चीरे के आसपास जलन या खुजली महसूस हो सकती है

बच्चेदानी निकालने के बाद उस महिला की पीरियड रुक जायेगी और वह गर्भधारणा नही कर पायेगी।

  1. जिन महिलाओं में उप कुल (सबटोटल) गर्भाशय-उच्छेदन होता हैं, उन्हें प्रक्रिया के बाद एक साल तक हल्का रक्तस्राव हो सकता है।लेकिन एंडोमेट्रियल अस्तर की थोड़ी मात्रा आपके गर्भाशय ग्रीवा में रह जाती है। इस वजह से हल्का रक्तस्राव होता है, जो माहवारी जैसा लग सकता है।

  2. यदि इस शल्य चिकित्सा में अंडाशय को रजोनिवृत्ति से पहले आपके गर्भाशय से हटा दिया जाता है, तो वह स्त्री रजोनिवृत्ति के लक्षणों का अनुभव कर सकती है।

आपके स्वाथ्य प्रदाता निम्न लक्षणों के इलाज के लिए गर्भाशय को निकाल सकते हैं

  1. योनि से असामान्य और अनियमित रक्तस्राव जो अन्य उपचार द्वारा रोका नहीं जाता हो

  2. माहवारी के साथ असहनीय दर्द जिसमे अन्य उपचार द्वारा राहत नहीं मिलती हो

  3. गर्भाशय में कैंसर रहित गांठे हो

  4. गर्भाशय से निगडित श्रोणी में दर्द जो उपचारों द्वारा प्रबंधित नहीं हो रही हो 

  5. गर्भाशय का प्रोलैप्स जिससे मूत्र असंयम या मल त्याग में कठिनाई होती हो

  6. गर्भाशय का कर्करोग  

  7. गर्भाशय पॉलीप्स या एडिनोमायोसिस

आपके शल्य चिकित्सक आपके रोग और उसके लक्षणों के आधार पर किस प्रकार का शल्य प्रक्रिया करनी है इसका निर्धार करते है।

आपका स्वास्थ्य सेवा प्रदाता कई अलग-अलग शल्य चिकिसा पद्धति का उपयोग कर सकता है। जैसे

  1. योनि गर्भाशयोच्छेदन में योनि के  ऊपर एक चीरा लगाकर आपका गर्भाशय निकाल दिया जाता है। 

  2. लैप्रोस्कोपिक गर्भाशयोच्छेदन में नाभी द्वारा एक छोटे से चीरे के माध्यम से एक पतली ट्यूब डाली जाती है। शल्य चिकित्सा के उपकरण कुछ अन्य छोटे चीरों के माध्यम से डाले जाते हैं। गर्भाशय को पेट में चीरों के माध्यम से या आपकी योनि के माध्यम से छोटे टुकड़ों में निकाला जाता है।

  3. रोबोटिक गर्भाशयोच्छेदन में मशीन की मदद से गर्भशाय को निकाला जाता है। 

  4. उदर गर्भाशयोच्छेदन में पेट में छह से आठ इंच लंबे चीरे के माध्यम से आपके गर्भाशय को बाहर निकाला जाता है।

गर्भाशय को निकलवाने का खर्च उसके लिए इस्तेमाल की जानेवाली प्रक्रिया पर अवलंबित होता है। आम तौर पर यह राशि ५५,००० से लेकर १,३०,००० के बीच होती है। सही और सटीक राशि आपको अपने वैद्य से मिलने पर, उनके द्वारा बतादी जाती है।

यदि आप गर्भाशय के कैंसर के उच्च जोखिम में हैं, तो गर्भाशय निकालने से इस जोखिम को कम किया जा सकता है। इस प्रकार से संभावित रूप से गर्भाशय निकालकर जान बचाई जा सकती है।

सन्दर्भ

हेक्साहेल्थ पर सभी लेख सत्यापित चिकित्सकीय रूप से मान्यता प्राप्त स्रोतों द्वारा समर्थित हैं जैसे; विशेषज्ञ समीक्षित शैक्षिक शोध पत्र, अनुसंधान संस्थान और चिकित्सा पत्रिकाएँ। हमारे चिकित्सा समीक्षक सटीकता और प्रासंगिकता को प्राथमिकता देने के लिए लेखों के संदर्भों की भी जाँच करते हैं। अधिक जानकारी के लिए हमारी विस्तृत संपादकीय नीति देखें।


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Updated on : 21 July 2023

Disclaimer: यहाँ दी गई जानकारी केवल शैक्षणिक और सीखने के उद्देश्य से है। यह हर चिकित्सा स्थिति को कवर नहीं करती है और आपकी व्यक्तिगत स्थिति का विकल्प नहीं हो सकती है। यह जानकारी चिकित्सा सलाह नहीं है, किसी भी स्थिति का निदान करने के लिए नहीं है, और इसे किसी प्रमाणित चिकित्सा या स्वास्थ्य सेवा पेशेवर से बात करने का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

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