लिवर कैंसर के लक्षण, कारण, उपचार और इलाज - Liver Cancer in Hindi

भारत में हर 1 लाख लोगों में से 3 से 5 लोगों को लिवर कैंसर होने की संभावना रहती है। इसका अर्थ है हर साल लिवर कैंसर के 30,000 से 50,000 नए मामले आते हैं।

आमतौर पर शुरुआत में लिवर कैंसर के लक्षण और संकेत दिखाई नहीं देते जिस वजह से लिवर की स्थिति खराब होती जाती है और हमें पता भी नही चल पाता है। यदि समय पर लिवर कैंसर का इलाज नहीं किया जाए तो यह जानलेवा भी हो सकता है।  

ऐसे में यह काफी जरुरी हो जाता हैं कि आपको लिवर कैंसर के लक्षण और उपाय के बारे में पता हो। तो आइये, इस आर्टिकल में लिवर कैंसर के शुरुआती और लिवर कैंसर के अंतिम लक्षण और इसके इलाज के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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लिवर कैंसर क्या है?

लिवर हमारे शरीर का महत्वपूर्ण भाग है जो पेट के ऊपरी दाएं हिस्से में और डायाफ्राम के नीचे स्थित होता है। लिवर खून में मौजूद अधिकांश रासायनिक तत्वों को नियंत्रित करता है। 

आमतौर पर ४० साल की उम्र के लोगों में लिवर कैंसर (हेपैटोसेलुलर कैंसर) होने की संभावना युवाओं की तुलना में अधिक रहती है। लिवर कैंसर को कई बार हेपेटिक कैंसर के नाम से भी जाना जाता है। लिवर कैंसर की पहचान करना बहुत ही मुश्किल होता है।

लिवर कैंसर हमारे लिवर की कोशिकाओं में शुरू होता है और धीरे-धीरे फैलने लगता है। जब कैंसर की कोशिकाएं जिगर से उसके आस पास की कोशिकाएं और अन्य अंगों में फैलने लगती है जहा लिवर की अन्य गतिविधियों में भी हस्तक्षेप करने लगती हैं तब लिवर कैंसर घातक हो सकता है और इस चरण को मेटास्टेसाइज कहते है। 

शुरुआत में लिवर कैंसर के कोई ख़ास लक्षण दिखाई नहीं देते हैं लेकिन जैसे-जैसे लिवर कैंसर बढ़ने लगता है, वैसे-वैसे इसके लक्षण महसूस होना शुरू हो जाते हैं। लिवर कैंसर के अधिकतर मामलों में मूल कारण का नहीं पता चल पाता है। कुछ मामलों में हेपेटाइटिस का इन्फेक्शन इसका मुख्य कारण हो सकता है।Liver cancer image

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लिवर कैंसर कितने प्रकार का होता है?

वैसे तो लिवर कैंसर के कई प्रकार होते हैं लेकिन लिवर कैंसर के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं। पहला प्राइमरी लिवर कैंसर और दूसरा सेकेंडरी लिवर कैंसर। 

प्राइमरी लिवर कैंसर 

प्राइमरी लिवर कैंसर में कैंसर की कोशिकाएं लिवर से ही विकसित होना शुरू करती हैं और अन्य ऊतकों और अंगों तक फैल जाती हैं। प्राइमरी लिवर कैंसर में भी कई प्रकार होते हैं जो निम्न हैं : 

  1. हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा: आमतौर पर 75% लिवर कैंसर हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा पर आधारित होते हैं। यह हेपेटाइटिस बी या हेपेटाइटिस सी से संबंधित इंफेक्शन के कारण होता है।
  2. फ़िब्रोलामेलर हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा: यह दुर्लभ प्रकार का लिवर कैंसर है, जो आमतौर पर मेडिकल ट्रीटमेंट से होता है।
  3. कोलेजनोकार्सिनोमा: लिवर कैंसर का यह प्रकार लिवर के पित्त नलिका में हो सकता है। आमतौर पर मरीजों में लिवर कैंसर के 10 से 20% मामलों में होता है।
  4. एंजियोसारकोमा: यह लिवर में रक्त वाहिकाओं (ब्लड वेसल्स) से शुरू होता है और तेजी से बढ़ता है। आमतौर पर 1% लिवर कैंसर के मामले एंजियोसारकोमा के होते हैं।

सेकेंडरी लिवर कैंसर या मेटास्टेटिक लिवर कैंसर 

सेकंडरी लिवर कैंसर में कैंसर की कोशिकाओं का विकास किसी अन्य अंग में शुरू होता है और ये फैलकर लिवर तक पहुंच जाती हैं और लिवर को प्रभावित करती हैं, इसे मेटास्टेटिक लिवर कैंसर के नाम से भी जाना जाता है।

लिवर कैंसर के लक्षण

ज़्यादातर मरीज़ों को लिवर कैंसर की शुरुआत में कोई विशेष लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। लेकिन जैसे-जैसे लिवर कैंसर की स्थिति समय के साथ बिगड़ने लगती है वैसे-वैसे इसके लक्षण महसूस होने लगते हैं। लिवर कैंसर के प्रमुख लक्षण निम्न लिखित हैं:

  1. वजन में कमी: लिवर कैंसर के मरीजों को अक्सर वजन में कमी दिखती है क्योंकि कैंसर शरीर के ऊतकों के लिए जरूरी खाद्य पदार्थों का अवशोषण करता है।
  2. बार-बार उल्टी करना: यह एक अन्य लक्षण हो सकता है, जो लिवर कैंसर के मरीजों में दिखता है। इसका कारण शायद यह हो कि कैंसर की वजह से उल्टी करने वाले नर्वों में दबाव होता है।
  3. पेट में दर्द: लिवर कैंसर के मरीजों को पेट में दर्द महसूस होता है जो कि वृद्धि कर सकता है जब कैंसर अधिक बढ़ जाता है।
  4. खून की कमी के कारण थका: लिवर कैंसर के मरीजों में कमजोरी और थकान आम होती है क्योंकि कैंसर शरीर के ऊतकों के लिए जरूरी खाद्य पदार्थों का अवशोषण करता है।Liver Cancer ke lakshan image

लिवर कैंसर किस कारण होता है?

ज़्यादातर मामलों में लिवर कैंसर होने के कारण स्पष्ट नहीं होते हैं। कुछ मामलों में लिवर कैंसर होने का कारण पता लगाया जा सकता है जैसे लिवर कैंसर का एक कारण क्रोनिक हेपेटाइटिस संक्रमण भी हो सकता है। 

आमतौर पर लिवर कैंसर के निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:

  1. सिरोसिस: इस में जिगर की कोशिकाएं बड़े पैमाने में नष्ट हो जाती है। लिवर सिरोसिस अक्सर शराब के अधिक सेवन करने से होता है। हालांकि यह अन्य कारणों से भी हो सकता है लेकिन शराब सिरोसिस होने का मुख्य कारण है। 
  2. फैटी लिवर का होना: फैटी लिवर की बीमारी से लिवर कैंसर हो सकता है, जो लिवर की पुरानी सूजन और निशान के कारण होता है, जिससे डीएनए की क्षति और म्यूटेशन हो सकता है जो अंततः कैंसर का कारण बन सकता है। फैटी लिवर रोग की जटिलता, सिरोसिस भी लिवर कैंसर के लिए एक ज्ञात जोखिम कारक है।
  3. जन्मजात: जन्म से ही किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य समस्या या किसी अन्य दोष होने के कारण भी लिवर कैंसर हो सकता है। 
  4. लंबे समय से इन्फेक्शन: हेपेटाइटिस बी या हेपेटाइटिस सी विषाणु से जुड़े पुराने इन्फेक्शन की वजह से रोगियों को लिवर का कैंसर होने की संभावना रहती है। 
  5. दुर्लभ बीमारियां: कुछ मामलों में लिवर कैंसर के विकास को टायरोसिन (आनुवंशिक विकार जो लिवर के काम में बांधा डालता है) और विल्सन बिमारी (जन्मजात बीमारी जिसमे लिवर, मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंगों में कॉपर जमा हो जाता है) से जोड़ा गया है। ऐसे दुर्लभ बीमारियां भी लिवर कैंसर का कारण बन सकती हैं। 
  6. आनुवंशिकी: यदि आपके परिवार में किसी सदस्य को लिवर की बीमारी है या इसका इतिहास है तो लिवर कैंसर के विकास की संभावना बढ़ जाती है।

जोखिम

  1. शराब का दुरुपयोग: लंबे समय तक अत्यधिक मात्रा में शराब पीने से सिरोसिस हो सकता है, एक ऐसी स्थिति जिसमें लिवर खराब हो जाता है और क्षतिग्रस्त हो जाता है, जिससे लिवर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
  2. अधिक मोटापा: व्यक्ति के शरीर का वजन बहुत ज़्यादा बढ़ जाना भी लिवर कैंसर का कारण बन सकता है। मोटापा गैर-मादक वसायुक्त यकृत रोग (एनएएफएलडी) के विकास के जोखिम को बढ़ाकर यकृत कैंसर का कारण बन सकता है, ऐसी स्थिति जिसमें यकृत में वसा जमा हो जाती है। NAFLD से लिवर में सूजन और जख्म हो सकता है, जो अंततः लिवर कैंसर का कारण बन सकता है। मोटापा भी शरीर में इंसुलिन प्रतिरोध और इंसुलिन के उच्च स्तर का कारण बन सकता है, जो लिवर में कैंसर कोशिकाओं के विकास को बढ़ावा दे सकता है।
  3. कुपोषण: लिवर कैंसर पोषक तत्वों को पचाने और अवशोषित करने की शरीर की क्षमता में हस्तक्षेप कर सकता है, जिससे कुपोषण और कमजोरी हो सकती है।
  4. मधुमेह का होना: मधुमेह से ग्रस्त मरीज़ों को भी लिवर कैंसर होने का खतरा होता है। उच्च रक्त शर्करा का स्तर यकृत की सूजन और निशान पैदा कर सकता है, जिससे यकृत की क्षति हो सकती है और यकृत कैंसर के विकास का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, मधुमेह वाले व्यक्तियों में गैर-मादक वसायुक्त यकृत रोग (एनएएफएलडी) विकसित होने का जोखिम भी बढ़ सकता है, जिससे यकृत कैंसर भी हो सकता है।
  5. रासायनिक पदार्थ: आर्सेनिक और विनाइल क्लोराइड जैसे रासायनिक पदार्थों का सेवन करना।

निवारण

रोग के विकास से जुड़े जोखिम कारकों को कम करने वाले कुछ उपाय करके लिवर कैंसर को रोका जा सकता है। लिवर कैंसर को रोकने के कुछ तरीके इस प्रकार हैं:

  1. स्वस्थ आहार और वजन बनाए रखें: स्वस्थ आहार खाने और स्वस्थ वजन बनाए रखने से लिवर कैंसर के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
  2. सुइयों को साझा करने से बचें: हेपेटाइटिस बी और सी को इंजेक्शन की दवा के उपयोग के लिए साझा करने वाली सुइयों के माध्यम से भी प्रेषित किया जा सकता है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि सुइयों को साझा न करें।
  3. हेपेटाइटिस बी के लिए टीका लगवाएं: हेपेटाइटिस बी का टीका हेपेटाइटिस बी वायरस के संक्रमण को रोकने का एक प्रभावी तरीका है, जो लिवर कैंसर के लिए एक प्रमुख जोखिम कारक है।
  4. सुरक्षित यौन संबंध बनाएं: हेपेटाइटिस बी और सी यौन संपर्क के माध्यम से प्रेषित हो सकते हैं, इसलिए कंडोम का उपयोग करके सुरक्षित यौन संबंध बनाना महत्वपूर्ण है। कुछ यौन संचारित संक्रमणों (एसटीआई) और यकृत कैंसर के विकास के बीच एक संबंध है। हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी वायरस एसटीआई के दो उदाहरण हैं जो जीर्ण जिगर की सूजन पैदा कर सकते हैं और यकृत कैंसर के विकास के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
  5. शराब का सेवन सीमित करें: लंबे समय तक अत्यधिक मात्रा में शराब पीने से लिवर खराब हो सकता है, जिससे लिवर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। शराब के सेवन को सीमित करना या इससे पूरी तरह बचना महत्वपूर्ण है।
  6. हानिकारक रसायनों के संपर्क में आने से बचें: एफ्लाटॉक्सिन और विनाइल क्लोराइड जैसे कुछ रसायनों के संपर्क में आने से लिवर कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। इन रसायनों के संपर्क में आने से बचने से लिवर कैंसर के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।
  7. नियमित चेक-अप करवाएं: यदि आपके पास लिवर की बीमारी या लिवर कैंसर के अन्य जोखिम कारकों का इतिहास है, तो किसी भी संभावित समस्या का जल्द पता लगाने के लिए नियमित जांच-पड़ताल और स्क्रीनिंग करवाना महत्वपूर्ण है।Nivaran image

लिवर कैंसर का निदान

लिवर कैंसर का पता लगाना काफी मुश्किल हो सकता है क्योंकि लिवर कैंसर के लक्षण शुरू में नहीं दिखते। लिवर कैंसर का निदान करने के लिए, आपके डॉक्टर आपसे आपकी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में पूछेंगे और आपके शारीरिक जांच करेंगे। लिवर कैंसर के निदान परीक्षण और प्रक्रिया में निम्नलिखित टेस्ट शामिल हैं:

  1. लिवर फंक्शन टेस्ट: इस टेस्ट से आपके डॉक्टर को आपके खून में प्रोटीन, लिवर एंजाइम और बिलीरुबिन के स्तर का पता लगता है, जिससे कैंसर का पता चल सकता है।
  2. अल्फा-फेटो प्रोटीन टेस्ट: आपके रक्त में अल्फा-फेटो प्रोटीन की उपस्थिति लिवर कैंसर का संकेत हो सकती है। यह प्रोटीन आमतौर पर केवल एक विकासशील भ्रूण के लिवर और जर्दी थैली में उत्पन्न होता है। अल्फा-फेटो प्रोटीन का उत्पादन आमतौर पर जन्म के बाद बंद हो जाता है।
  3. इमेजिंग टेस्ट: अल्ट्रा साउंड, सीटी स्कैन या एमआरआई स्कैन टेस्ट से आपके पेट में लिवर और अन्य अंगों की स्पष्ट तस्वीर तैयार की जाती है। इन तस्वीरों से आपके डॉक्टर को यह पता लगाने में मदद मिलती है कि ट्यूमर कहां विकसित हो रहा है, इसका आकार कितना है और कैंसर अन्य अंगों में फैल गया है या नहीं। 
  4. लिवर बायोप्सी: यदि लिवर फंक्शन टेस्ट, अल्फा-फेटो प्रोटीन टेस्ट और इमेजिंग टेस्ट करने पर भी लिवर कैंसर की स्थिति का सही कारण नहीं पता चल रहा तब आपके डॉक्टर लिवर बायोप्सी कर सकते हैं। लिवर बायोप्सी में डॉक्टर लिवर के ऊतकों का एक छोटा सा टुकड़ा निकालते है और परीक्षण करते हैं। अक्सर लिवर बायोप्सी करने से पहले मरीज को लोकल एनेस्थीसिया दी जाती है जिससे मरीज को दर्द नहीं होता है। liver cancer ka nidan image

लिवर कैंसर का इलाज

चिंता न करें। लिवर कैंसर का इलाज संभव है। लिवर कैंसर के उपचार के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं। उपचार की प्रक्रिया तय करने के लिए आपके डॉक्टर निम्नलिखित कारकों पर विचार करेंगे और इसके आधार पर इलाज की प्रक्रिया निर्धारित की जाएगी:

आपके लिवर में ट्यूमर की संख्या, आकार और स्थान?

आपका लिवर कितनी अच्छी तरह काम कर रहा है?

सिरोसिस मौजूद है या नहीं?

कैंसर अन्य अंगों में फैल गया है या नहीं?

आमतौर पर लिवर कैंसर का इलाज निम्नलिखित तरीकों से किया जा सकता है :  

शल्य चिकित्सा

  1. सर्जरी: लिवर कैंसर में सर्जरी से इलाज किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में कैंसर वाले हिस्से को निकाल देते हैं। यदि मरीज के लिवर में छोटा ट्यूमर बना है तो इसका सर्जरी से इलाज किया जा सकता है। 
  2. लिवर ट्रांसप्लांट: ट्रांसप्लांट प्रक्रिया में कैंसर वाले लिवर को हटाकर उस जगह स्वस्थ लिवर से बदल देते है। लेकिन लिवर ट्रांसप्लांट इलाज़ तब ही संभव है जब कैंसर किसी और अंग (ऑर्गन) में न फैला हो। 

गैर शल्य चिकित्सा 

  1. एबलेशन: इस प्रकिया में मरीज को बेहोश कर कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए इंजेक्शन दिए जाते हैं। यह प्रक्रिया उन मरीज़ों के लिए अधिक फायदेमंद होती है जिनकी सर्जरी या लिवर ट्रांसप्लांट नहीं हो सकता है।
  2. रेडिएशन थेरेपी: रेडिएशन थेरेपी में हार्ट एनर्जी वाले रेडिएशन का इस्तेमाल करते हैं जिससे कैंसर ग्रस्त कोशिकाएं को नष्ट करने का प्रयास किया जाता है। रेडिएशन थेरेपी के साइड इफेक्ट्स ज्यादा हो सकते हैं जिस वजह से त्वचा की समस्या और उल्टी की समस्या हो सकती है।
  3. कीमोथेरेपी: कीमोथेरेपी का इस्तेमाल भी कैंसर से ग्रस्त कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए किया जाता है। यह दवाओं के माध्यम से दी जाती है। लिवर कैंसर में कीमोथेरेपी काफी प्रभावी उपचार है। परंतु इसकी दवाओं के वजह से मरीज को उल्टी, हेयर लॉस, भूख कम लगना, ठंड लगना, शरीर में दर्द होना और शरीर में गर्मी काफी ज्यादा बढ़ जाना आदि समस्याओं का सामना मरीज को करना पड़ सकता है 
  4. ट्रांसएटेरियल केमोएम्बोलाइज़ेशन (TACE): लिवर कैंसर के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक न्यूनतम इनवेसिव उपचार विकल्प है। TACE लिवर कैंसर के लिए एक न्यूनतम इनवेसिव उपचार है जिसमें स्वस्थ ऊतकों को नुकसान को कम करते हुए कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए ट्यूमर की धमनी में कीमोथेरेपी दवाओं और एक अवरोधक एजेंट को सीधे इंजेक्ट करना शामिल है।liver cancer ka ilaj image

लिवर कैंसर के लिए आहार परिवर्तन

यदि आपको लिवर कैंसर है तो आहार परिवर्तन करना महत्वपूर्ण है क्योंकि लिवर हमारे द्वारा खाए जाने वाले भोजन को तोड़ने और संसाधित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जिगर रक्त से विषाक्त पदार्थों और अपशिष्ट उत्पादों को छानने और उन्हें कम हानिकारक पदार्थों में बदलने के लिए जिम्मेदार होता है जिन्हें शरीर से बाहर निकाला जा सकता है। लिवर कैंसर इन कार्यों को बाधित कर सकता है और गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं को जन्म दे सकता है।

लिवर कैंसर के लिए एक आहार में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल होने चाहिए जो पोषक तत्वों से भरपूर हों और लिवर पर कोमल होने के साथ-साथ समग्र स्वास्थ्य का समर्थन करते हों। यहाँ कुछ विशिष्ट खाद्य पदार्थों पर विचार किया गया है:

  1. फल और सब्जियां: फल और सब्जियां एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन और खनिजों में उच्च होती हैं जो सूजन को कम करने और लिवर की कार्यप्रणाली में मदद कर सकती हैं। विभिन्न प्रकार के रंगीन विकल्प चुनें, जैसे पत्तेदार साग, जामुन, खट्टे फल, और ब्रोकोली और फूलगोभी जैसी क्रुसिफेरस सब्जियाँ।
  2. साबुत अनाज: साबुत अनाज फाइबर और अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्वों का एक अच्छा स्रोत हैं, और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने और स्वस्थ पाचन का समर्थन करने में मदद कर सकते हैं। ब्राउन राइस, क्विनोआ, पूरी गेहूं की रोटी और दलिया जैसे विकल्प चुनें।
  3. लीन प्रोटीन: चिकन, टर्की, मछली, बीन्स और दाल जैसे लीन प्रोटीन लिवर पर सौम्य रहते हुए आवश्यक अमीनो एसिड प्रदान कर सकते हैं। प्रोसेस्ड मीट से बचें और ग्रिल्ड, बेक्ड या रोस्टेड विकल्प चुनें।
  4. स्वस्थ वसा: स्वस्थ वसा जैसे कि नट, बीज, एवोकाडो और मछली का तेल जैसे सैल्मन में पाए जाने वाले यकृत समारोह का समर्थन करने और सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं। प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले संतृप्त और ट्रांस वसा को सीमित करें और इसके बजाय स्वस्थ वसा चुनें।Ahaar parivartan image

लिवर कैंसर का आयुर्वेदिक इलाज

आयुर्वेद चिकित्सा की एक प्राचीन भारतीय प्रणाली है जो स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और बीमारी को रोकने के लिए जड़ी-बूटियों, आहार परिवर्तन और जीवन शैली में संशोधन का उपयोग करती है। हालांकि लिवर कैंसर के लिए कोई विशिष्ट आयुर्वेदिक उपचार नहीं है, लेकिन कुछ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां और उपचार लक्षणों को प्रबंधित करने और समग्र स्वास्थ्य में सुधार करने में सहायक हो सकते हैं।

यहाँ कुछ आयुर्वेदिक उपचार दिए गए हैं जो अक्सर लिवर के स्वास्थ्य के लिए उपयोग किए जाते हैं:

  1. दूध थीस्ल एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जो आमतौर पर लिवर के स्वास्थ्य के लिए उपयोग की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो लिवर को नुकसान से बचाने में मदद कर सकते हैं।
  2. हल्दी: हल्दी एक ऐसा मसाला है जिसका उपयोग अक्सर आयुर्वेदिक दवाओं में इसके सूजन-रोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण किया जाता है। यह लिवर में सूजन को कम करने और क्षति को रोकने में मदद कर सकता है।
  3. आंवला: आंवला, एक ऐसा फल है जिसका उपयोग आमतौर पर आयुर्वेदिक दवाओं में इसके एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए किया जाता है। यह लिवर को नुकसान से बचाने और लिवर की कार्यक्षमता में सुधार करने में मदद कर सकता है।
  4. त्रिफला: त्रिफला एक आयुर्वेदिक हर्बल मिश्रण है जिसके बारे में माना जाता है कि यह लिवर को डिटॉक्सिफाई करने और लिवर की कार्यक्षमता में सुधार करने में मदद करता है।liver cancer ka ayurvedic ilaaj image

लिवर कैंसर के लिए जीवनशैली में बदलाव

यदि आपको लिवर कैंसर का निदान किया गया है या इसके विकसित होने का खतरा है, तो जीवनशैली में कुछ बदलाव करने से आपके समग्र स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है और जटिलताओं का खतरा कम हो सकता है। यहां जीवनशैली में कुछ बदलाव दिए गए हैं जो लिवर कैंसर के लिए फायदेमंद हो सकते हैं:

  1. हाइड्रेटेड रहें: खूब पानी और अन्य तरल पदार्थ पीने से लिवर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिल सकती है और जटिलताओं का खतरा कम हो सकता है। हाइड्रेटेड रहना लिवर के कार्य और समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। यदि आप शारीरिक रूप से सक्रिय हैं या गर्म जलवायु में हैं, तो प्रति दिन कम से कम 8 कप पानी पीने का लक्ष्य रखें।
  2. स्वस्थ वजन बनाए रखें: लिवर कैंसर के लिए मोटापा एक जोखिम कारक है। नियमित व्यायाम और स्वस्थ आहार के माध्यम से स्वस्थ वजन बनाए रखने से आपके जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।टीका लगवाएं: यदि आपने पहले से नहीं लगाया है, तो हेपेटाइटिस बी के खिलाफ टीका लगवाएं। हेपेटाइटिस सी के लिए कोई टीका नहीं है, लेकिन आप संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए कदम उठा सकते हैं।
  3. धूम्रपान छोड़ें: धूम्रपान लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है और लिवर कैंसर के विकास के आपके जोखिम को बढ़ा सकता है। लिवर कैंसर और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने के लिए धूम्रपान छोड़ना एक महत्वपूर्ण कदम है।
  4. नमक का सेवन सीमित करें: ज्यादा नमक लिवर कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है। प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करने की सिफारिश की जाती है, जिनमें अक्सर नमक का उच्च स्तर होता है।
  5. शराब का सेवन सीमित करें: बहुत अधिक शराब पीने से लिवर खराब हो सकता है और लिवर कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। अपनी शराब की खपत को सीमित करें या इसे पूरी तरह से टाल दें।
  6. कम ग्लाइसेमिक आहार पर विचार करें: कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि कम ग्लाइसेमिक आहार, जिसमें चीनी और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होती है, लिवर कैंसर के रोगियों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
  7. सुइयों को साझा करने से बचें: सुइयों या अन्य इंजेक्शन उपकरण साझा करने से आपके हेपेटाइटिस बी और सी का खतरा बढ़ सकता है।

जीवनशैली में ये परिवर्तन करके, आप लिवर कैंसर के अपने जोखिम को कम करने और अपने समग्र स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद कर सकते हैं।Jeevanshaili mein badlav image

जोखिम और जटिलता

लिवर कैंसर गंभीर जटिलताओं को जन्म दे सकता है और इससे मृत्यु दर का उच्च जोखिम होता है। लिवर कैंसर से जुड़े कुछ जोखिमों और जटिलताओं में शामिल हैं:

  1. मेटास्टेसिस: लिवर कैंसर फेफड़ों और हड्डियों जैसे अन्य अंगों में फैल सकता है, जिससे उपचार अधिक कठिन हो जाता है।
  2. लिवर खराब होना: जैसे-जैसे लिवर कैंसर बढ़ता है, यह लिवर की कार्यक्षमता को खराब कर सकता है, जिससे लिवर फेल हो सकता है।
  3. द्रव संचय: लिवर कैंसर पेट में तरल पदार्थ के संचय का कारण बन सकता है, इस स्थिति को जलोदर के रूप में जाना जाता है। इससे बेचैनी, सांस लेने में कठिनाई और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
  4. रक्त के थक्के: लिवर कैंसर वाले लोगों में रक्त के थक्के बनने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे स्ट्रोक या पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं।
  5. संक्रमण का बढ़ता जोखिम: लिवर कैंसर वाले लोगों में कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली हो सकती है, जिससे वे संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।

सारांश

लिवर कैंसर एक गंभीर स्वास्थ्य स्थिति है जो तब होती है जब लिवर में असामान्य कोशिकाएं नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं। लिवर कैंसर के लिए कई जोखिम कारक हैं, जिनमें क्रोनिक वायरल हेपेटाइटिस, अत्यधिक शराब का सेवन, मोटापा और विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आना शामिल है। प्रभावी उपचार के लिए शुरुआती पहचान महत्वपूर्ण है, और पेट दर्द, पीलिया और थकान जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

लिवर कैंसर के उपचार के विकल्पों में सर्जरी, विकिरण चिकित्सा, कीमोथेरेपी, लक्षित चिकित्सा, और ट्रांस-धमनी कीमोएम्बोलाइज़ेशन (TACE) शामिल हैं। जीवनशैली में बदलाव जैसे धूम्रपान छोड़ना, शराब का सेवन कम करना, स्वस्थ वजन बनाए रखना और नियमित व्यायाम करना भी लिवर कैंसर को रोकने और प्रबंधित करने में मदद कर सकता है।

शराब के सेवन को सीमित करने, फलों, सब्जियों, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन से भरपूर स्वस्थ आहार का सेवन करने और हाइड्रेटेड रहने जैसे आहार परिवर्तन भी लिवर कैंसर के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। कुछ आयुर्वेदिक उपचार और उपचार जैसे दूध थीस्ल, हल्दी, आंवला, त्रिफला, योग और ध्यान भी लक्षणों को प्रबंधित करने और समग्र स्वास्थ्य में सुधार करने में सहायक हो सकते हैं।

कुल मिलाकर, लिवर कैंसर एक गंभीर स्वास्थ्य स्थिति है जिसके लिए शीघ्र निदान और उपचार की आवश्यकता होती है। स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के साथ मिलकर काम करने और स्वस्थ जीवन शैली विकल्प बनाने से लिवर कैंसर वाले व्यक्तियों के लिए परिणामों और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिल सकती है। इसलिए, यदि आप लिवर कैंसर को स्थायी रूप से और सुरक्षित रूप से ठीक करना चाहते हैं, तो HexaHealth में हमारे डॉक्टरों की टीम से संपर्क करें। हम यहां हर कदम पर आपकी मदद करने के लिए हैं।

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अधिकतर पूछे जाने वाले सवाल

लिवर कैंसर के लक्षण आमतौर पर जल्दी पकड़ में नहीं आते हैं इसकी वजह से लिवर कैंसर गंभीर रूप ले सकता है। इसीलिए समय रहते लिवर कैंसर का पता लगना आवश्यक है। आमतौर पर लिवर टेस्ट और रक्त की जांच करने से लिवर कैंसर का पता लगाया जा सकता है। लिवर कैंसर का पता लगाने के लिए शारीरिक टेस्ट और हेल्थ हिस्ट्री, अल्फा-फेटोप्रोटीन ट्यूमर मार्कर टेस्ट, लिवर फंक्शन टेस्ट, सिटी स्कैन, एमआरआई, अल्ट्रासाउंड टेस्ट और पीईटी टेस्ट करके लिवर कैंसर का न सिर्फ पता लगाया जा सकता है बल्कि लिवर की स्थिति, ट्यूमर की संख्या आदि का पता चल सकता है। 

 

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आमतौर पर लिवर कैंसर के शुरुआती स्टेज में इस के संकेतों को पहचानना आम लोगों के लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है। लेकिन यदि हम सतर्कता बरतते हैं तो लिवर कैंसर के संकेत पहचान सकते है। जैसे कि किसी काम करने के बाद थकान महसूस होना, मरीज का वजन घटना और उल्टी होना यह लिवर कैंसर के पहले संकेत हो सकते हैं। 

 

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अगर लिवर कैंसर का पता शुरू में ही लग जाए तो आमतौर पर लिवर कैंसर का इलाज संभव होता है। इसके अलावा लिवर कैंसर का इलाज मरीज़ के लिवर की स्थिति, ट्यूमर की संख्या, आकार, स्थान आदि पर निर्भर करता है। वर्तमान में लिवर कैंसर का इलाज निम्नलिखित तरीकों से किया जाता है लिवर ट्रांसप्लांट, कीमो थेरेपी, सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, एबलेशन |

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लिवर कैंसर के अंतिम स्टेज में मरीज के लिम्फ नोड और अगल - बगल के अंगों में कैंसर फैल चुका होता है। अंतिम स्टेज के लिवर कैंसर को मेटास्टेटिक लिवर कैंसर भी कहते हैं। ऐसे में व्यक्ति की जीवित रहने की आशा बहुत कम रह जाती है। हालांकि अंतिम स्टेज में जीवित रहने का समय कई कारकों पर निर्भर करता है जैसे लिवर कैंसर का प्रकार, मरीज का स्वास्थ्य,उपचार होने पर कुछ सुधार हुआ या नहीं, आदि। एक स्टडी में यह पाया गया कि लिवर कैंसर के अंतिम स्टेज में जीवित रहने की औसत दर ४ साल और ११ महीने होती है।

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यदि लिवर कैंसर के लक्षणों की ओर अनदेखी किया गया या कैंसर के इलाज में देरी की गई तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। आमतौर पर कैंसर के अंतिम चरण में प्रलाप (डेलीरियम), बहुत अधिक थकान महसूस होना, सांस लेने में कठिनाई होन, दर्द होन, खांसन, कब्ज़ होना, निगलने में दिक्कत होना, सांस लेने के साथ खड़खड़ाहट की आवाज़ होना, मायोक्लोनिक झटके आना, बुखार आना, रक्तस्राव होना जैसे लक्षण हो सकते हैं|

 

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लिवर आपके शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। ऐसे में यदि लिवर में किसी प्रकार की समस्या हो जाए तो आपको कई तरह की गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है; खासतौर पर जब लिवर में इंफेक्शन हो जाए। लिवर इंफेक्शन से लिवर डैमेज होने का खतरा अधिक बढ़ जाता है। लिवर इंफेक्शन के लक्षण कुछ इस तरह हो सकते हैं उल्टी और मतली आना, तेज पेट दर्द होना, कुछ लोगों के पेट में सूजन आ सकती, पीलिया होना, स्किन पर रैशेज आना, खुलजी होना, पेशाब के रंग में बदलाव नज़र आना और भूख की कमी।

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यदि किसी वजह से आपके लिवर में सूजन आती है तो इसका सीधा असर आपके पाचन तंत्र पर पड़ता है। पाचन तंत्र बिगड़ने के कारण आपका शरीर कमजोर पड़ जाता है और आपको अन्य बीमारियां हो सकती हैं। वहीं, लिवर की कोशिकाओं में बहुत अधिक फैट जमने से आपको फैटी लिवर की समस्या भी हो सकती है जिसे हम लिवर में सूजन होना कहते हैं। यदि फैटी लिवर का सही से इलाज नहीं किया गया या इलाज में देरी होने पर लिवर कैंसर होने का खतरा रहता है।

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लिवर कैंसर तब होता है जब लिवर कोशिकाओं के डीएनए में परिवर्तन होते हैं। डीएनए आपके शरीर में हर रासायनिक प्रक्रिया के लिए निर्देश देते हैं। डीएनए में परिवर्तन होने से इन निर्देशों में परिवर्तन हो जाते हैं। इसका एक यह परिणाम भी हो सकता है कि कोशिकाएं नियंत्रण से बाहर बढ़ना शुरू कर दें और अंततः एक ट्यूमर का विकास होने लगे। लिवर कैंसर होता है तो मरीज को खुजली, आंखों या त्वचा का पीला पड़ना, पेट में दर्द या सूजन, पैर और टखनों में सूजन, मल में पीलापन, पेशाब का रंग गहरा होना, भूख नहीं लगना, थकान, उल्टी या जी मिचलाना आदि लक्षण देखने को मिल सकते हैं। यदि सही समय पर लिवर कैंसर का इलाज नहीं किया जाएं तो कैंसर वाला ट्यूमर आस-पास के ऊतकों और लिंफ नोड्स तक फैल सकता है जो काफ़ी ख़तरनाक हो सकता है।

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लिवर आपके शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अधिक मात्रा में शराब का सेवन, धूम्रपान करना, अनियंत्रित खान-पान, आनुवांशिक कारण, जीवनशैली में बदलाव और अन्य कारणों से लिवर खराब होता है। लिवर डैमेज होने पर आपके शरीर में निम्नलिखित लक्षण दिख सकते हैं: खुजली होना, आंखों या त्वचा का पीला पड़ना, पेट में दर्द होना या सूजन आना, पैर और टखनों में सूजन आना, मल में पीलापन, पेशाब का रंग गहरा होना, भूख नहीं लगना, उल्टी होना या जी मिचलाना, थकान रहना, आसानी से स्किन पर नील पड़ जाना। 

 

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Updated on : 28 August 2023

समीक्षक

Dr. Aman Priya Khanna

Dr. Aman Priya Khanna

MBBS, DNB General Surgery, Fellowship in Minimal Access Surgery, FIAGES

12 Years Experience

Dr Aman Priya Khanna is a well-known General Surgeon, Proctologist and Bariatric Surgeon currently associated with HealthFort Clinic, Health First Multispecialty Clinic in Delhi. He has 12 years of experience in General Surgery and worke...View More

लेखक

Sangeeta Sharma

Sangeeta Sharma

BSc. Biochemistry I MSc. Biochemistry (Oxford College Bangalore)

6 Years Experience

She has extensive experience in content and regulatory writing with reputed organisations like Sun Pharmaceuticals and Innodata. Skilled in SEO and passionate about creating informative and engaging medical conten...View More

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