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अक्सर लोग जानना चाहते हैं कि एसाइटिस का हिंदी में क्या अर्थ होता है? (Ascites meaning in hindi)। इस लेख के माध्यम से जानते है कि एसाइटिस आखिरकार होता क्या है? और उसका हिन्दी में क्या अर्थ होता है? एसाइटिस को हिन्दी में जलोदर कहते हैं। जलोदर की अवस्था में मरीज के पेट में बहुत अधिक तरल पदार्थ जमा हो जाता है।
अब सभी लोग, ये जानने के लिए उत्सुक होंगे कि एसाइटिस या जलोदर होने की वजह से क्या हो सकता है, इसका अर्थ क्या है? , तो इस जानकारी के लिए यह लेख ध्यान से पढ़ें। इसके अलावा आगे जानिए कि एसाइटिस या जलोदर होने के लक्षण, प्रकार, कारण, निदान, रोकथाम, दवा, उपचार और अन्य महत्वपूर्ण विवरण।
| रोग का नाम | एसाइटिस (जलोदर) |
| लक्षण | अचानक वजन बढ़ना, बड़ा सूजा हुआ पेट |
| कारण | लिवर सिरोसिस, हार्ट फेलियर, किडनी रोग, कैंसर |
| निदान | लिवर फंक्शन टेस्ट, पैरासेन्टेसिस, एब्डोमिनल अल्ट्रासाउंड |
| इलाज कौन करता है | गैस्ट्रोलॉजिस्ट |
| उपचार के विकल्प | पैरासेन्टेसिस, ट्रांसजगुलर इंट्राहेपेटिक पोर्टोसिस्टमिक शंट (टिप्स), लीवर ट्रांसप्लांट |
एसाइटिस या जलोदर पेट में, विशेष रूप से उदर गुहा में अतिरिक्त द्रव के निर्माण के बाद उसके जमा होने को संदर्भित करता है। तो अब जानते हैं कि पेट में कहाँ यह तरल पदार्थ जमा हो जाता है?
मनुष्य के पेट में पेरिटोनियम नामक ऊतक की एक शीट पेट, आंतों, यकृत और गुर्दे समेत पेट के सभी अंगों को चारों तरफ से ढकती है। इसी पेरिटोनियम की दो परतें होती हैं और जब इन दोनों परतों के बीच में तरल पदार्थ बनने लगता है, तब उसे एसाइटिस या जलोदर कहते हैं।
एसाइटिस या जलोदर की स्थिति अक्सर उन लोगों में होती है जिन्हें लिवर का सिरोसिस (स्काररिंग) होता है। जलोदर के लगभग 80% मामलों में मरीज को सिरोसिस की तकलीफ होती है।
जलोदर क्या है और इसका अर्थ जानने के बाद, आइए इस भाग में विस्तार से जानते हैं कि जलोदर कितने प्रकार के होता है और किस आधार पर इसे वर्गीकृत किया जाता है। वर्गीकरण के हिसाब से डॉक्टर द्वारा मरीज का उपचार और स्वास्थ्य स्तिथि निर्धारित की जाती है।
जलोदर निनलिखित तरह से वर्गीकृत किया गया है:
| जलोदर के ग्रेड | जलोदर वर्गीकरण | विवरण |
| ग्रेड 1 जलोदर | हल्के जलोदर (mild ascites meaning in hindi) | इस ग्रेड में तरल पदार्थ की मात्र कम होती है, और यह अल्ट्रासाउंड परीक्षा द्वारा पता लगाया जा सकता है। |
| ग्रेड 2 जलोदर | मध्यम जलोदर (moderate ascites meaning in hindi) | पेट का फैलाव सममित होता है। |
| ग्रेड 3 जलोदर | बड़े जलोदर (large/gross ascites meaning in hindi) | इस ग्रेड में पेट काफी फूल जाता है, या कह सकते हैं की उदर का अधिक फैलाव हो जाता है। |
| जलोदर वर्गीकरण | विवरण |
| जलोदर जो जटिल नहीं है (अनकोंपलिकेटेड एसाइटिस ) |
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| दुर्दम्य जलोदर (रिफ्रैक्टरी एसाइटिस) |
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एसाइटिस या जलोदर कि वजह से उदर क्षेत्र में धीरे-धीरे तरल पदार्थ का निर्माण होता है। इस की वजह से जलोदर से पीढ़ित मरीज को तक्लीफ़ हो सकती है और विभिन्न लक्षणो का सामना करना पड़ सकता है।
जब जलोदर की बात आती हैं, तो इसका मुख्य लक्षण एक बढा हुआ पेट और तेजी से वजन का बढ़ना होता है। अन्य लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं:
पेट में तरल पदार्थ इकट्ठा होने के विभिन्न कारण और जोखिम कारक हो सकते हैं। जलोदर के कुछ सामान्य कारण और जोखिम कारक यहाँ दिए गए हैं:
ऐसे कुछ जोखिम कारक होते है जो जलोदर के विकास की संभावना को बढ़ा सकते हैं, खासकर जो स्तिथि सिरोसिस का कारण बन सकती है, उससे जलोदर विकसित होने का अधिक खतरा होता है। इन कारकों में शामिल हैं:
एसाइटिस या जलोदर एक ऐसी स्तिथि है, जिसके विकसित होने के विभिन्न कारण हो सकते हैं। इन्ही कारणों को संभोदित करते हुए जलोदर कि रोकथाम की जा सकती है। जलोदर के लिए कुछ निवारक उपायों का यहाँ विवरण किया गया है।
एक स्वस्थ जीवन शैली जीना ही जलोदर को रोकने का सबसे बेहतरीन तरीका है जिसमे शामिल हैं:
एक स्वस्थ जीवन शैली न सिर्फ जलोदर की रोकथाम करती है, बल्कि समस्त स्वास्थ्य का ध्यान रखती है और विभिन्न बीमारियों से बचाती है।
जलोदर के निदान के लिए चिकित्सक आबसे पहले मरीज का सम्पूर्ण मेडिकल इतिहास लेंगे, उनके लक्षणों को विस्तार से पूछेंगे और व्यापक रूप से पेट का परीक्षण करेंगे।
सभी तरह की जाँचों का निमलिखित उद्देश्य है:
चिकित्सक अन्य परीक्षण जैसे रक्त परीक्षण, द्रव्य का परीक्षण, और इमेजिंग तकनीक का सुझाव दे सकते हैं।
डॉक्टर से परामर्श करने से पहले ही तेयारी कर ले और निमलिखित बातों का ध्यान रखें:
मरीज अपने डॉक्टर से उम्मीद कर सकते हैं कि वे उनकी तकलीफों से शुरुआत करते हुए उनके मेडिकल इतिहास के बारे मे पूछेंगे। तत्पश्चात वे बारीकी से पेट का परीक्षण करेंगे, और ऊपर दिये गए टेस्टस का सुझाव देंगे अन्यथा टेस्टस के माध्यम से पता लगाएंगे कि आखिर जलोदर कितना गंभीर है, और उसका कारण क्या है।
जलोदर के मरीज अपने डॉक्टर से निम्नलिखित सवाल पूछ सकते हैं:
इसके उपरांत चिक्तसक से जलोदर के होने का कारण, निदान, उपचार, रोकथाम, और उपचार से जुड़ी जटिलताओ पर विस्तार से बातचीत करें।
एसाइटिस या जलोदर के उपचार में कई तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे एसाइटिस को कम किया जाता है, और उससे होने वाली तकलीफ में आराम मिलता है। इसके लिए चिकित्सक द्वारा उपचार में निम्नलिखित सुझाव दिए जा सकते है:
पेट में तरल पदार्थ के निर्माण को कम करने और जलोदर से जुड़ी जटिलताओं को रोकने के लिए जीवन शैली में बदलाव मुख्य भूमिका निभाता है, और इसमे शामिल है:
जलोदर का घरेलू उपचार: घर पर ही जलोदर पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है और इसमे मुख्य रूप से जीवन शैली मे बदलाव शामिल होता है जैसे नमक के सेवन को कम करके, शराब और धूम्र पान को बिल्कुल बंद करके, और निरंतर रूप से व्यायाम करने से एसाइटिस द्रव को घर पर काबू मे किया जा सकता है।
कुछ शोध के अनुसार आयुर्वेदिक दवाएं, जलोदर द्रव में राहत प्रदान कर सकती है। अभयादि मोदक, गाय के मूत्र, शरपुंखा स्वरस, पुनर्नवा क्वाथ के साथ नित्य विरेचन (दैनिक चिकित्सीय विरेचन) देने से जलोदर द्रव को कम करने मे मदद मिलती है।
इसके अलावा यह भी देखा गया है कि इन आयुर्वेदिक दवाओ और प्रक्रियाओ का कोई भी दुष्प्रभाव नहीं होता है।
कुछ आयुर्वेदिक दवाएं और जड़ी बूटियां हैं जैसे आरोग्यवर्धिनी वटी और सर्पुंखा स्वरसा, पुनर्नवादि क्वाथ और पुनर्नवादि मंडुरा, हरीतकी आदि जो जलोदर से राहत देने मे लाभकारी साबित हुई हैं।
होमेयोपथी में कुछ दवाइयाँ जलोदर के लक्षणो को कम करने के लिए असरदार हो सकती हैं जैसे एसिटिकम एसिडम। ध्यान रहे कि होमेयोपथी कि दवाये चिकित्सक कि निगरानी में ही ली जाएँ क्योंकि हाल में किए गए अध्ययनों से पता चला है कि कई दवाईया लिवर को क्षति पहुचा सकती हैं।
कभी-कभी, जलोदर में सुधार के लिए मूत्रवर्धक दवाएं और कम सोडियम वाला आहार पर्याप्त नहीं होता है। इनके साथ में अन्य उपचारों की आवश्यकता हो सकती है जिसमे शामिल हैं I
| उपचार | उपचार लागत |
| एसिटिक टैप | ₹२५,००० से ₹२,००,००० |
| ट्रांसजुगुलर इंट्राहेपेटिक पोर्टोसिस्टमिक शंट (टिप्स) | ₹१,७०,००० से ₹४,००,००० |
| लीवर ट्रांसप्लांट | ₹१५,००,००० से ₹३५,००,००० |
सुचना: उपचार का तरीका और प्रक्रियाओं का चयन रोगी की स्वास्थ्य स्थिति और आपके इलाज करने वाले डॉक्टर की राय पर निर्भर करता है।
लोदर कई जटिलताओं को जन्म दे सकता है, खासकर जब इसका इलाज नहीं किया जाता है या खराब प्रबंधन किया जाता है। जलोदर की कुछ संभावित जटिलताओं में शामिल हैं:
डॉक्टर को कब देखना है?
अगर कोई व्यक्ति एसाइटिस या जलोदर की समस्या से पीढ़ित हैं और बुखार और पेट दर्द के लक्षण आते है तो उसे तुरंत आपातकालीन कक्ष में जाकर डॉक्टर से मिलना चाहिए।
समय पर इलाज नहीं किया तो जोखिम?
एसाइटिस या जलोदर जिगर की क्षति का एक महत्वपूर्ण संकेत है। यदि जलोदर को अनुपचारित छोड़ दिया जाता है, तो यह जीवन को क्षति पहुचाने वाली जटिलताओं को जन्म दे सकता है। लेकिन ठीक समय पर उचित उपचार और आहार में बदलाव के साथ, जलोदर का प्रबंधन कर सकते हैं।
आहार जलोदर के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, पेट की गुहा में तरल पदार्थ के संचय की विशेषता वाली स्थिति। जबकि जलोदर के अंतर्निहित कारण और गंभीरता के आधार पर आहार संबंधी सिफारिशें भिन्न हो सकती हैं, यहां कुछ सामान्य दिशानिर्देश दिए गए हैं जो मदद कर सकते हैं:
जलोदर ज्यादातर जिगर की क्षति का संकेत होता है, विशेष रूप से सिरोसिस से पीढ़ित लोग इसे विकसित कर सकते हैं। समय पर सही उपचार और आहार में बदलाव के साथ, जलोदर का प्रबंधन किया जा सकता हैं, जिसके लिए कम मात्रा में नमक का सेवन करना जलोदर के लिए सबसे प्रभावी उपचारों में से एक है। इसके अलावा कुछ लोगों में मूत्रवर्धक दवाई और सर्जिकल प्रक्रिया भी लाभकारी साबित होती है।
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जलोदर पर अधिक पढ़ने के लिए आप नीचे दिए गए लिंक पर जा सकते हैं:
| फैटी लिवर डाइट चार्ट | लिवर कैंसर |
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Last Updated on: 26 June 2023

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Dr Aman Priya Khanna is a highly experienced and National Board–Certified Laparoscopic, GI, and Bariatric Surgeon with over 13 years of clinical expertise.
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She is a B Pharma graduate from Banaras Hindu University, equipped with a profound understanding of how medicines works within the human body. She has delved into ancient sciences such as Ayurveda and gained valuab...View More
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