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गठिया या गठिया बाय जिसे हम अंग्रेजी में अर्थराइटिस नाम से भी जानते हैं आजकल बहुत ही आम बीमारी हो गई हैं। भारत में लगभग 18 करोड़ लोग अर्थराइटिस की बीमारी से प्रभावित होते हैं। 2011 के ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज, इंजरीज़ एंड रिस्क फैक्टर के स्टडी के अनुसार सिर्फ घुटनों के अर्थराइटिस से 6.2 करोड़ लोग प्रभावित हैं।
ये रोग आज ना सिर्फ़ बूढ़े लोगों में देखने को मिलता है बल्कि इसकी चपेट में नौजवान लोग भी आ रहे हैं। अर्थराइटिस से पीड़ित लोगों के शरीर में काफ़ी दर्द होता है। अर्थराइटिस घुटनों और कूल्हे की हड्डियों पर अधिक प्रभाव डालता है।
इस्से बचाव के लिए कुछ घरेलू उपाय और नॉन सर्जिकल उपचारों से अर्थराइटिस से होने वाले दर्द और सूजन को कम किया जा सकता है। चलिए समझते हैं कि आर्थराइटिस क्या होता है, इसके कारण क्या हैं, गठिया के लक्षण क्या होते हैं और गठिया रोग से बचाव कैसे किया जा सकता है।
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रोग का नाम |
गठिया |
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वैकल्पिक नाम |
गठिया बाय |
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लक्षण |
जोड़ों में दर्द, लालिमा, सूजन, जोड़ों में जलन रहना, वजन का घटना, घुटनों को मोड़ने में असहनीय दर्द होना |
| कारण | जोड़ों का घिसना, अनुवांशिक, ऑटोइम्यून डिसऑर्डर |
| निदान | एक्स-रे, कम्प्यूटरीकृत टोमोग्राफी, अल्ट्रासाउंड |
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किसके द्वारा उपचार |
ऑर्थोपेडिक सर्जन |
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उपचार के विकल्प |
दवाइयां, टॉपिकल पेन रिलीवर्स, इंजेक्शन, आर्थ्रोस्कॉपी, जॉइंट रिसर्फेसिंग, ऑस्टियोटमी |
अर्थराइटिस जोड़ों से संबंधित एक समस्या है। इस रोग में व्यक्ति के जोड़ों में दर्द होता है तथा उनमें सूजन आ जाती है। अर्थराइटिस शरीर के किसी एक जोड़ या एक से अधिक जोड़ को प्रभावित कर सकता है।
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सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक अर्थराइटिस के 100 से भी अधिक प्रकार हैं। हालांकि इनमे से कुछ प्रकार ही अधिकतर जनसंख्या में देखने को मिलता है। अर्थराइटिस के कुछ मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:
जोड़ों में दर्द होने से गठिया रोग की पहचान नही की जा सकती है। जोड़ों में सिर्फ दर्द होना आर्थ्राल्जिया का संकेत होता है लेकिन जोड़ों में सूजन के कारण दर्द रहना अर्थराइटिस का लक्षण होता है। अर्थराइटिस के कुछ मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं:
अर्थराइटिस के होने के कई कारण हो सकते हैं। चोट लगने से, जोड़ों में इन्फेक्शन होने से और कुछ अन्य कारणों से अर्थराइटिस देखा जा सकता है।
गठिया होने के कुछ मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
जोड़ों का घिसना - उपास्थि (नरम हड्डी) जो आपके जोड़ों में हड्डियों के सिरों को कुशन करती है, धीरे-धीरे बिगड़ती जाती है। आखिरकार, अगर उपास्थि पूरी तरह से खराब हो जाती है, तो हड्डी हड्डी पर रगड़ जाएगी।
ऑटोइम्यून डिसऑर्डर - जब प्रतिरक्षा प्रणाली खुद ही शरीर के ऊतकों पर हमला करके उन्हें नष्ट करने लगती है तो जोड़ों में दर्द रहने लगता है।
मांसपेशी में कमजोरी - पोषक तत्वों या अन्य कारणों से मांसपेशी में कमजोरी आने पर जोड़ों में भी दर्द हो सकता है जो आर्थराइटिस का मुख्य लक्षण है।
कुछ व्यवहार और विशेषताएं, जिन्हें जोखिम कारक कहा जाता है, एक वयस्क के कुछ प्रकार के गठिया होने या इसे बदतर बनाने की संभावना को बढ़ाते हैं। आप कुछ जोखिम कारकों को नियंत्रित कर सकते हैं, और अन्य आप नहीं कर सकते। आप जिन जोखिम कारकों को नियंत्रित कर सकते हैं उन्हें बदलकर आप गठिया होने या गठिया को बदतर बनाने के अपने जोखिम को कम कर सकते हैं।
अर्थराइटिस जैसी बीमारी का बचाव करने के लिए कुछ तरीके अपनाना फायदेमंद हो सकता है। आर्थराइटिस से बचाव के लिए कुछ निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
अर्थराइटिस के कारण जब जोड़ों का दर्द बढ़ जाता है और घरेलू उपायों से भी आराम नही मिल पाता है तो कुछ नॉन सर्जिकल उपचार जैसे दवाइयों और इंजेक्शन का सहारा लिया जाता है। नॉन सर्जिकल उपचार से भी यदि आर्थराइटिस के लक्षण कम नही होते हैं तो अंततः सर्जरी करके ही इसका उपचार किया जा सकता है। नॉन सर्जिकल और सर्जिकल उपचार निम्नलिखित हैं:
भारत में गठिया की लागत कई कारकों के आधार पर भिन्न हो सकती है, जिसमें सर्जरी के प्रकार जैसे सर्जरी के प्रकार, अस्पताल या क्लिनिक जहां प्रक्रिया की जाती है, और स्थान शामिल हैं। यहां विभिन्न प्रकार की गठिया की लागत पर प्रकाश डालने वाली तालिका दी गई है:
| सर्जरी का नाम | सर्जरी की लागत |
| आर्थ्रोस्कॉपी | ₹ 45000 - ₹ 200000 |
| ऑस्टियोटमी | ₹ 120000 - ₹ 180000 |
| टोटल ज्वाइंट रिप्लेसमेंट | ₹ 90000 - ₹ 300000 |
| साइनोवेक्टोमी | ₹ 10000 - ₹ 70000 |
इस लेख में हमने समझा कि आर्थराइटिस जोड़ों की बीमारी है जिससे जोड़ों में सूजन हो जाता है और दर्द होता है। गठिया होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे अनुवांशिक कारण, चोट, ऑटोइम्यून विकार, उम्र इत्यादि। आर्थराइटिस से बचने के लिए स्वस्थ जीवनशैली रखना आवश्यक होता है। गठिया के लक्षणों को कम करने के लिए घरेलू उपाय और नॉन सर्जिकल उपचार की सहायता ली जा सकती है। अगर आर्थराइटिस के कारण दैनिक जीवन बुरी तरह से प्रभावित होता है तो अंततः सर्जरी का सहारा लेना पड़ सकता है।
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अर्थराइटिस होने के पीछे चोट लगना, असामान्य चयापचय (एबनॉर्मल मेटाबॉलिज्म), संक्रमण, मोटापा, खराब जीवनशैली और अनुवांशिक कारण हो सकते हैं।
अर्थराइटिस को ठीक करने के लिए व्यायाम करना, ठंडी व गर्म सिकाई करना, संतुलित आहार लेना जैसे की मछली, ताजे फल और सब्जियां, फलियां आदि का सेवन मददगार हो सकता है।
गठिया की शुरुआत कई कारणों से होती है जैसे चोट लगने से, जोड़ों में संक्रमण होने से, ऑटोइम्यून की बीमारी होने से, खेल - कूद में अधिक सक्रिय रहने से, जोड़ों का अधिक इस्तेमाल करने से और कुछ अन्य कारणों से जोड़ों में दर्द रहने लगता है जिसे गठिया रोग कहते हैं।
गठिया रोग मुख्य रूप से कैल्शियम और विटामिन डी की कमी से हो सकता है। आर्थराइटिस फाउंडेशन के अनुसार आयरन, मैग्नीशियम, कॉपर, क्रोमियम, सेलेनियम, फोलेट, सोडियम, विटामिन ए, विटामिन बी १, बी २, बी ३, बी ६, बी १२, विटामिन सी, विटामिन ई, विटामिन के और जिंक जैसे तत्वों की कमी से भी गठिया रोग हो सकता है।
गठिया रोग के लिए दर्द और अकड़न को कम करने के लिए कुछ ओवर द काउंटर दवाएं जैसे कि आइबूप्रोफेन और नेप्रोक्सीन ली जा सकती हैं। इसके अलावा कुछ घरेलू उपाय भी अपनाए जा सकते हैं जैसे की गर्म दूध में हल्दी मिलाकर सेवन करने से जोड़ों का सूजन कम होता है।
ऑर्थोपेडिक डॉक्टर आर्थराइटिस के निदान के लिए कई तरह के जांच कर सकते हैं जो निम्नलिखित हैं:
गठिया के रोग का पता लगाने के लिए डॉक्टर कुछ ब्लड टेस्ट करते हैं जैसे इराइथ्रोसाइट सेडीमेंटेशन रेट (ईएसआर), सी - रिएक्टिव प्रोटीन (सीआरपी), फुल ब्लड काउंट, एंटी - साइक्लिक सिट्रूलिनेटेड (सीबीसी) और रूमेटाइड फैक्टर से आर्थराइटिस का पता लग सकता है।
वैसे तो अर्थराइटिस के 100 से भी ज्यादा प्रकार हो सकते हैं लेकिन कुछ मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:
गठिया रोग एक ऐसी बीमारी है जिसको पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है। हालांकि सही इलाज से इस रोग के प्रभाव और लक्षणों को कम किया जा सकता है। इसीलिए ऑर्थोपेडिक डॉक्टर रोगी को कुछ दवाइयां जैसे कि आइबुप्रोफेन, स्टीरॉयड इंजेक्शन लेने के साथ-साथ फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, व्यायाम करने की सलाह दे सकते हैं।
अर्थराइटिस का मतलब होता है शरीर के एक या एक से अधिक जोड़ों में सूजन और जकड़न का आ जाना। आर्थराइटिस होने पर मरीज के जोड़ों में जलन का एहसास भी हो सकता है।
गठिया में ऐसे फल खाना फायदेमंद हो सकता है जिनमें विटामिन सी और सूजन को कम करने वाले गुण पाए जाते हैं जैसे कि:
गठिया का दर्द शुरुआती समय में हल्का होता है जिसमें रोगी को जलन भी महसूस हो सकती है। जैसे-जैसे यह रोग पुराना होता जाता है वैसे - वैसे दर्द में भी तीव्रता हो सकती है। तेज दर्द के साथ-साथ पीड़ित व्यक्ति को जोड़ों में ऐठन और जकड़न का एहसास भी हो सकता है।
दूध में कैल्शियम होता है जो हड्डियों को मजबूती देता है। दूध में यदि वसा अधिक है तो इससे जोड़ों में सूजन होने की आशंका रहती है। इसलिए गठिया के मरीजों को कम वसा वाले दूध का सेवन करना चाहिए।
लहसुन में सूजनरोधी गुण मौजूद होते हैं इसलिए लहसुन का इस्तेमाल गठिया में हुए सूजन को कम करने के लिए किया जाता है। गठिया रोग के कारण जोड़ों में हुए सूजन को कम करने के लिए लहसुन की २-३ कलियां लेकर उन्हें छीलकर कच्चा या फिर पकाकर खाया जा सकता है।
Last Updated on: 16 April 2025

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13 Years Experience
Dr Aman Priya Khanna is a highly experienced and National Board–Certified Laparoscopic, GI, and Bariatric Surgeon with over 13 years of clinical expertise.
He is widely regarded as one of the best bariatric surgeons in Ahmedabad, ...View More

She is a B Pharma graduate from Banaras Hindu University, equipped with a profound understanding of how medicines works within the human body. She has delved into ancient sciences such as Ayurveda and gained valuab...View More


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