Anxiety Meaning in Hindi - चिंता के कारण, लक्षण, प्रकार, इलाज

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आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में चिंता से घिरा रहना मानों आम बात हो गई हो। भविष्य में क्या होगा या वर्तमान में जो कुछ हुआ है, उसका परिणाम क्या होगा? इस सब बातों को लेकर मन में चिंता बनी रहती है। चिंता कम या अधिक हो सकती है। कुछ समय के लिए चिंता का होना कोई बीमारी नहीं कहलाता है। लंबे समय तक चिंता से घिरे रहने पर चिंता विकार पैदा होता है।

चिंता विकार मानसिक बीमारी का सबसे आम उदाहरण है। चिंता विकार 13 से 18 वर्ष के बीच के 31.9% किशोरों को प्रभावित करता है। हर साल चिंता विकार से वयस्कों के साथ ही अधिक उम्र के लोग भी पीड़ित होते हैं। चिंता का मतलब क्या होता है, चिंता के लक्षण, प्रकार, कारण, निदान, रोकथाम, दवाएं, उपचार और अन्य महत्वपूर्ण विवरणों के बारे में जानने के लिए पढ़ते रहें।

बीमारी का नाम चिंता
वैकल्पिक नाम चिंता विकार
लक्षण हाथों में ठंडा पसीना, नींद की समस्या, मुंह सूखना, बेचैनी या घबराहट, छाती में दर्द, कांपना
कारण रासायनिक असंतुलन, पर्यावरणीय कारक, आनुवंशिकता, सामाजिक चिंता विकार
निदान रोगी का इतिहास, नैदानिक ​​परीक्षण, जांच
इलाज कौन करता है मनोविज्ञानी, मनोचिकित्सक
उपचार के विकल्प ध्यान लगाना, व्यायाम, जीवनशैली में बदलाव, दवाएं, टॉक थेरेपी

चिंता का मतलब क्या है?

चिंता शब्द डर और बेचैनी से जुड़ा हुआ है। जब व्यक्ति चिंता में डूबा होता है तो उसे अचानक से पसीना आ सकता है, बेचैनी हो सकती है। साथ ही तनाव (टेंशन) के साथ दिल की धड़कन भी तेज हो सकती है। वैसे तो चिंता के कारण पसीना आना, बेचैनी या धड़कन तेज होना आदि सामान्य प्रतिक्रिया माना जाता है।

कोई बुरी खबर सुनने पर चिंतित होना, परीक्षा या इंटरव्यू देने से पहले चिंतित होना, जीवन में घटित किसी बुरी घटना को याद कर चिंतित हो जाना आदि सामान्य है। चिंता होना कोई बीमारी नहीं है। जब यह चिंता अस्थाई की जगह स्थाई हो जाती है तो यह एक मानसिक बीमारी का रूप ले लेती है। इसे चिंता विकार (anxiety disorder meaning in hindi) कहा जाता है।

चिंता विकार का क्या मतलब है?

चिंता विकार एक प्रकार का मानसिक विकार है। जो लोग चिंता विकार से पीड़ित होते हैं, उनकी चिंता खत्म नहीं होती है। समय के साथ चिंता विकार के लक्षण और भी बुरे होते जाते हैं।

चिंता विकार के प्रकार

चिंता विकार एक नहीं बल्कि कई प्रकार का होता है। व्यक्ति के आसपास के हालात या परिस्थितिया चिंता विकार के प्रकार को जन्म देते हैं। चिंता विकार के प्रकार निम्नलिखत हैं:

  1. सामान्यकृत चिंता विकार/ जेनेरलीज़ेड एंग्जायटी डिसऑर्डर (जी.ऐ.डी.): सामान्यकृत चिंता विकार में व्यक्ति कुछ सामान्य कारणों जैसे कि काम, परिवार, स्वास्थ्य आदि विषयों को लेकर चिंतित रहता है।
    जी.ऐ.डी. का निदान तब होता है, जब व्यक्ति को छह महीने से अधिक चिंता रहती है।
  2. घबराहट की समस्या या पैनिक डिसऑर्डर: पैनिक अटैक का अनुभव करने वाले कुछ लोगों में पैनिक डिसऑर्डर विकसित हो जाता है। पैनिक डिसऑर्डर एक प्रकार का चिंता विकार है।
    ऐसे व्यक्तियों को जब भी कोई खतरा महसूस होता है तो शरीर में विभिन्न प्रकार के लक्षण दिखने लगते हैं।
    एंग्जायटी अटैक और पैनिक अटैक के लक्षणों को लेकर अक्सर लोग दुविधा में रहते हैं। एंग्जायटी अटैक और पैनिक अटैक समान नहीं होते हैं। पैनिक अटैक आमतौर पर डर की स्थिति में कभी भी आ सकता है। जबकि एंग्जायटी अटैक लंबे समय तक चिंता से घिरे रहने पर आता है। पैनिक डिसऑर्डर से पीड़ित लोग अक्सर इस बारे में चिंता करते हैं कि अगला हमला कब होगा और वो कैसा महसूस करेंगे।
  3. फोबिया या भय: फोबिया या भय में व्यक्ति को किसी भी चीज से डर लग सकता है। जो लोग फोबिया से पीड़ित होते हैं, उन्हें सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर, भीड़भाड़ वाली जगहों से भी डर लग सकता है या खतरा महसूस हो सकता है।
    ऐसे लोगों को भीड़ में जाने से, किसी जानवर से, मकड़ी से, छिपकली से, ऊचांई से, इंजेक्शन से, खून से या फिर कुछ सामाजिक स्थितियों से भी भय लग सकता है।
  4. अलग होने की चिंता: यह स्थिति ज्यादातर बच्चों या किशोरों में पाई जाती है। बच्चों को अक्सर माता-पिता से अलग होने की चिंता लगी रहती है। बच्चों को अक्सर ये चिंता लगी रहती है कि उनके माता-पिता वादे से मुकर जाएंगे।

चिंता के लक्षण

चिंता के लक्षण या एंग्जायटी के लक्षण सभी व्यक्तियों में कम या ज्यादा दिख सकते हैं। चिंता विकार के शारीरिक सामान्य लक्षण निम्नलिखत हैं:

  1. हाथों में ठंडा पसीना आना।
  2. नींद की समस्या।
  3. मुंह सूखना।
  4. बेचैनी या घबराहट।
  5. जी मिचलाना।
  6. छाती में दर्द।
  7. कांपना।
  8. हाथ या पैर में झनझनाहट महसूस होना।
  9. मांसपेशियों में तनाव।
  10. सांस लेने में कठिनाई।
  11. दिल का तेज धड़कना।

चिंता विकार के मानसिक सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं:

  1. डर लगना।
  2. बेचैनी।
  3. बुरे सपने आना।
  4. ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई।
  5. बार-बार बुरे विचार या दर्दनाक अनुभव याद आना।

चिंता विकार के सामान्य व्यवहार संबंधी लक्षण निम्नलिखित हैं:

  1. स्थिर और शांत रहने में असमर्थता।
  2. नींद न आना।
  3. अनुष्ठानिक व्यवहार, जैसे बार-बार हाथ धोना।
अगर व्यक्ति चिंता की परेशानी से जूझ रहा है तो जरूरी नहीं है कि उपरोक्त दिए गए सभी लक्षण व्यक्ति में नजर आएं।

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चिंता विकार के कारण

चिंता विकार एक प्रकार का मानसिक विकार है। चिंता विकार के कारण के बारे में शोधकर्ताओं को जानकारी नहीं है। कुछ कारक चिंता का कारण बन सकते हैं।

  1. रासायनिक असंतुलन: व्यक्ति की मनोदशा या मूड को नियंत्रित रखने में रसायन का अहम योगदान होता है। लंबे समय तक तनाव के कारण रासायनिक असंतुलन हो जाता है। इस कारण से चिंता विकार हो सकता है।
  2. पर्यावरणीय कारक: जीवन में कोई दुर्घटना या आघात भी चिंता विकार का कारण बन सकता है।
  3. आनुवंशिकता: चिंता विकार का कारण अनुवांशिकी से जुड़ा भी हो सकता है। अगर किसी माता-पिता को चिंता विकार की समस्या है, तो हो सकता है कि बच्चों में भी ये विकार हो जाए।
  4. सामाजिक चिंता विकार: अक्सर कुछ लोगों में ये डर होता है कि दूसरे लोग मेरे बारे में क्या सोचेंगे? कभी-कभी सामाजिक स्थितियों का डर इतना ज्यादा हो जाता है कि यह नियंत्रण से बाहर हो जाता है। ये भी चिंता विकार का एक कारण है। इस कारण से पेट में दर्द, आंखों में संपर्क रखने में कठिनाई आदि लक्षण दिखाई देते हैं।

चिंता विकार से जुड़े जोखिम कारक

चिंता विकार से जुड़े जोखिम कारक में आनुवांशिक और पर्यावरणीय कारक मुख्य रूप से शामिल हैं। प्रत्येक प्रकार के चिंता विकार के जोखिम कारक अलग-अलग होते हैं।

  1. बचपन में किसी दर्दनाक घटना या आघात के कारण बच्चों में चिंता विकार का जोखिम बढ़ जाता है।
  2. तनावपूर्ण या नकारात्मक जीवन या पर्यावरणीय घटनाओं के संपर्क में आने से भी जोखिम बढ़ सकता है।
  3. परिवार में चिंता या मानसिक विकार का इतिहार भी चिंता विकार के जोखिम को बढ़ा देता है।
  4. स्वास्थ्य संबंधि समस्याएं जैसे कि थायराइड की समस्या, दिल संबंधी समस्या आदि से जूझ रहे लोगों को भी चिंता विकार की अधिक संभावन होती है।
  5. पारिवारिक कलह, तनावपूर्ण परिस्थितियां आदि भी व्यक्ति के चिंता विकार जोखिम को बढ़ा देती है।
  6. कैफीन का अधिक सेवन भी चिंता विकार को बढ़ाने का काम करता है।
चिंता विकार से संबंधित जोखिम के बारे में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर लक्षणों का निदान कर बीमारी का इलाज करेंगे।

चिंता की रोकथाम

चिंता विकार से बचना संभव नहीं है। अगर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो चिंता विकार के लक्षणों को कम किया जा सकता है। जानिए किन बातों का ध्यान रखकर चिंता विकार के लक्षणों को कम किया जा सकता है।

  1. स्वस्थ्य जीवनशैली: चिंता विकार से बचने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बहुत जरूरी है। रोजाना संतुलित आहार लेने के साथ ही व्यायाम और अच्छी नींद चिंता विकार से बचाने के साथ ही कई बीमारियों से बचाती है।
  2. ओवर- द- काउंटर दवाएं: किसी दवा का सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर से या फार्मासिस्ट से जानकारी जरूर लेना चाहिए। कुछ ओवर- द- काउंटर दवाएं या हर्बल उपचार चिंता विकार के लक्षणों को बढ़ाने का काम कर सकते हैं।
  3. कैफीन का सीमित सेवन: रोजाना अधिक मात्रा में चाय और कॉफी का सेवन करते हैं तो इसे तुरंत सीमित कर देना चाहिए। चाय या कॉफी, चॉकलेट और कोला का अधिक मात्रा में सेवन करने से चिंता विकार के लक्षण अधिक गंभीर हो सकते हैं।
  4. जरूर लें सहायता: अगर जीवन में कोई दर्दनाक घटना घटी है तो इसे मन में दबाकर नहीं रखना चाहिए। ऐसे में किसी दोस्त से या डॉक्टर से इस बारे में खुलकर बात कर सकते हैं। किसी से सहायता लेने से चिंता को कम करने में मदद मिल सकती है।

चिंता विकार का निदान कैसे किया जाता है?

चिंता विकार का निदान करने के लिए डॉक्टर मरीज के लक्षणों के बारे में जानकारी लेते हैं। चिंता विकार का निदान निम्न प्रकार से किया जाता है।

  1. रोगी का इतिहास: डॉक्टर मरीज से यह भी जानकारी लेते हैं कि मरीज को पहले से कोई बीमारी तो नहीं है। साथ ही ये भी पूछ सकते हैं कि रोगी कितने साल से चिंता के कारण परेशान है।
  2. नैदानिक ​​परीक्षण: नैदानिक परीक्षण में डॉक्टर मरीज को रोग की स्थिति जानते हैं। इससे बीमारी का निदान करने में मदद मिलती है।
  3. जांच: जांच के दौरान मरीज की शारीरिक जांच की जाती है। साथ ही साक्षात्कार और मूल्यांकन उपकरण का इस्तेमाल भी किया जाता है। इससे जानकारी मिलती है कि रोगी के लक्षण कितने तीव्र हैं और कितने समय तक चलते हैं।
    साथ ही मानसिक विकारों के नैदानिक और सांख्यिकीय मैनुअल (डीएसएम-5) से भी परामर्श किया जाता है। डीएसएम-5 मानसिक बीमारियों के निदान के लिए मानक संदर्भ पुस्तिका है।

डॉक्टर के परामर्श की तैयारी कैसे करें?

डॉक्टर से परामर्श की तैयारी के लिए सबसे पहले नियुक्ति लें। तय समय पर डॉक्टर से मिलें।

  1. डॉक्टर को चिंता से संबंधित वो सभी बातें बताएं, जो पिछले कुछ समय से आप महसूस कर रहे हैं।
  2. डॉक्टर से कोई भी बात न छिपाएं और बीमारी के लक्षणों को कब से महसूस कर रहे हैं, ये भी बताएं।

डॉक्टर से क्या उम्मीद करें?

डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक परीक्षण और चिंता के निदान के बाद उचित सलाह देंगे। उनकी सभी सलाह को जरूर मानें।

डॉक्टर से क्या सवाल पूछने चाहिए?

  1. आप डॉक्टर से मन में उठ रहे प्रश्नों के सभी जवाब ले सकते हैं। यहां कुछ प्रश्न दिए जा रहे हैं:
  2. क्या चिंता विकार के लक्षण अधिक बढ़ सकते हैं?
  3. दैनिक जीवन के कार्यों में इन लक्षणों से क्या समस्या हो सकती है?
  4. चिंता बीमारी का इलाज क्या है?
  5. चिंता बीमारी क्या पूरी तरह से ठीक हो जाएगी?

यदि मरीज को कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं है, तो डॉक्टर मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन कराने की सलाह दे सकते हैं।

चिंता विकार का इलाज

चिंता विकार के उपचार लिए मुख्य रूप से मनोचिकित्सा (टॉक थेरेपी), दवाएं या दोनों ही शामिल किए जाते हैं। चिंता विकार के लिए कौन-सा उपचार चुना जाएगा, ये बीमारी के निदान के बाद डॉक्टर तय करते हैं।

  1. चिंता विकार के घरेलू उपचार: चिंता विकार के लिए घरेलू उपचार अपनाकर बीमारी के लक्षणों को कम किया जा सकता है। जानिए चिंता विकार के घरेलू उपचार के बारे में।
    1. जब व्यक्ति के मन में बुरी बातें या विचार आते हैं, तो ऐसे में ध्यान लगाना बहुत फायदा पहुंचाता है। रोजाना ध्यान करने से आराम महसूस होता है।
    2. व्यायाम तनाव के लिए जिम्मेदार रसायन को कम करने में मदद करते हैं। हफ्ते में तीन से चार दिन व्यायाम जरूर करना चाहिए।
    3. खानपान में बदलाव करके भी चिंता विकार के लक्षणों को कम किया जा सकता है। खानपान में पत्तेदार साग जैसे पालक, फलियां, साबुत अनाज आदि शामिल किया जा सकता है।
    4. निकोटीन, कैफीन और उत्तेजक दवाएं (कैफीन युक्त) आपके अधिवृक्क ग्रंथियों (एड्रिनल ग्लैंड्स) को एड्रेनालाईन रिलीज करने के लिए ट्रिगर करती हैं। एड्रेनालाईन तनाव रसायनों में से एक है। इन सभी का सेवन कम कर देना चाहिए।
  2. जीवनशैली में बदलाव: चिंता विकार या एंग्जायटी डिसऑर्डर के लक्षणों को कम करने के लिए जीवनशैली में बदलाव बहुत जरूरी हैं।रोजाना व्यायाम, मेडिटेशन, पौष्टिक और संतुलित आहार, अच्छी नींद आदि बहुत जरूरी हैं।साथ ही परिवार और दोस्तों के साथ रोजाना बातचीत भी चिंता विकार के लक्षणों को काबू करने में मदद करते हैं।
  3. चिंता विकार के लिए दवाएं: चिंता विकार के लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए चिंता-विरोधी दवाएं दी जाती है। साथ ही टीडिप्रेसेंट दिए जाते हैं। डॉक्टर से परामर्श के बाद ही दवाओं का सेवन करना चाहिए।बेंजोडायजेपाइन दवा चिंता और घबराहट को दूर करता है। कुछ दवाएं चिंता विकार के लक्षणों को कम करने में बहुत मदद करती हैं। इस बात की जानकारी डॉक्टर से लेनी चाहिए।बीटा-ब्लॉकर्स का इस्तेमाल उच्च रक्तचाप के लिए किया जाता है। बीटा-ब्लॉकर्स चिंता विकारों के कुछ शारीरिक लक्षणों जैसे कि तेजी से दिल धड़कना, कंपन आदि से छुटकारा दिलाने में मदद करते हैं। डॉक्टर से परामर्श के बाद ही दवाओं का सेवन करना चाहिए।
  4. टॉक थेरेपी: मनोचिकित्सा या टॉक थेरेपी की मदद से चिंता विकार के लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है। इससे चिंतित व्यक्ति की भावनाओं, व्यवहार को पहचानकर उन्हें बदलने में मदद मिलती है। मनोचिकित्सा में मुख्य रूप से दो थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है।
    1. संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (सी.बी.टी): इसे थेरेपी के दौरान मनोचिकित्सक व्यक्ति से उसकी परेशानियों, विचारों और भावनाओं के बारे में परामर्श करते हैं।संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी के दौरान ये सिखाया जाता है कि भय और चिंता के समय कैसी प्रतिक्रिया दी जानी चाहिए।
      इस थेरेपी के दौरान पैनिक अटैक के ट्रिगर्स (वो परिस्थितियां जिससे व्यक्ति भयभीत हो जाता है) पहचानने में मदद मिलती है।
    2. एक्सपोजर थेरेपी: इस थेरिपी के दौरान मनोचिकित्सक धीरे-धीरे व्यक्ति की कल्पना और वास्तविकता को उजागर करता है। इस थेरेपी की मदद से व्यक्ति चिंता, घबराहट आदि के साथ सहज होना सीख जाता है। इस दौरान सांस संबंधि व्यायाम भी कराए जाते हैं।
  5. चिंता विकार के लिए वैकल्पिक विकल्प: चिंता विकार को दूर करने के लिए वैकल्पिक विकल्प में विश्राम तकनीक, हर्बल उपचार, योगा आदि को अपनाया जा सकता है। हर्बल उपचार में कैमोमाइल का इस्तेमाल किया जा सकता है। कैमोमाइल में चिंता-विरोधी और अवसादरोधी गुण होते हैं।

चिंता विकार से संबंधित विशेष मामले

कुछ विशेष मामलों जैसे कि बच्चे के जन्म के बाद मां को चिंता विकार, बच्चों में चिंता विकार आदि मामलों में डॉक्टर की सहायता लेना बहुत जरूरी होता है। बच्चों में अगर चिंता विकार का उपचार सही समय पर न हो, तो भविष्य में पारिवारिक रिश्ते, विद्यालय प्रदर्शन, सामाजिक जीवन आदि पर बुरा असर पड़ता है।

चिंता विकार से संबंधित जटिलताएं

चिंता विकार का यदि सही समय पर उपचार न किया जाए, तो बहुत सी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। आईबीएस (पेट संबंधी समस्या), सिर में दर्द, नींद न आना, जीवन की खराब गुणवत्ता, लोगों से दूरी बनाना, मांसपेशियों में दर्द आदि जटिलताओं का सामना करना पड़ता है।

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

चिंता का मतलब क्या है, इस बारे में  जानकारी जरूर मिल गई होगी। अब जानिए कि आखिर कब डॉक्टर से परामर्श करना जरूरी हो जाता है।

  1. अधिक चिंता के कारण रिश्तों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा हो।
  2. जब चिंता का दौरा या एंग्जायटी अटैक पड़ता है, तो व्यक्ति को ये हार्ट अटैक जैसा प्रतीत होता है। अगर एंग्जायटी अटैक के लक्षण दिखे, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

चिंता या एंग्जायटी होने पर यदि समय पर उपचार न मिले, तो मरीज गंभीर कदम भी उठा सकता है।

चिंता विकार से बचाव के लिए खानपान

चिंता विकार से बचाव में खानपान अहम भूमिका निभाता है। शरीर में मैग्नीशियम की कमी चिंता, अवसाद और अनिद्रा का कारण बन सकती है। चिंता विकार से बचने के लिए खानपान में क्या शामिल करना चाहिए और क्या नहीं, इसकी जानकारी होना बहुत जरूरी है।

क्या खाएं?

  1. खाने में विटामिन बी युक्त खाद्य पदार्थ जैसे कि दूध, दही, नट्स, फलियां, मशरूम, दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज, अंडा आदि शामिल करें।
  2. चिंता विकार से बचने के लिए खाने में कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ जैसे कि दूध, पनीर, डेयरी उत्पाद भी शामिल करने चाहिए।

जब भी संभव हो ताजा, असंसाधित खाद्य पदार्थ चुनें।

क्या न खाएं?

चिंता विकार को बढ़ाने के लिए कुछ खानपान जिम्मेदार भी हो सकते हैं। इन्हें खानपान में शामिल नहीं करना चाहिए।

  1. निकोटीन या कैफीन का सेवन शरीर में तनाव रसायन बढ़ाता है इसलिए इनका सेवन नहीं करना चाहिए।
  2. उत्तेजक दवाएं (कैफीन युक्त दवाएं) अधिवृक्क ग्रंथियों को एड्रेनालाईन जारी करने के लिए ट्रिगर करती हैं, जो मुख्य तनाव रसायनों में से एक है।
  3. खाद्य पदार्थों में नमक और कृत्रिम योजक को शामिल करने से बचना चाहिए।

इन सभी की मात्रा सीमित करनी चाहिए या पूरी तरह से इनका सेवन रोक देना चाहिए।

निष्कर्ष

अंत में, चिंता एक सामान्य मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है जो सभी उम्र और पृष्ठभूमि के लोगों को प्रभावित कर सकती है। जबकि समय-समय पर चिंता के कुछ स्तर का अनुभव करना सामान्य है, अत्यधिक और लगातार चिंता का व्यक्ति के दैनिक जीवन और कल्याण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

चिकित्सा, दवा और जीवन शैली में परिवर्तन सहित कई प्रभावी उपचार विकल्प उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त, व्यायाम, ध्यान और तनाव कम करने वाली गतिविधियों जैसे स्व-देखभाल का अभ्यास भी चिंता के लक्षणों को प्रबंधित करने में मदद कर सकता है। उचित समर्थन और उपचार के साथ, चिंता का प्रबंधन करना और जीवन की समग्र गुणवत्ता में सुधार करना संभव है।

यदि आपको चिंता के बारे में कोई और संदेह है, तो HexaHealth विशेषज्ञ से संपर्क करें। HexaHealth आपकी सभी स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं के लिए आपका वन-स्टॉप प्लेटफॉर्म है।

अधिकतर पूछे जाने वाले सवाल

चिंता विकार को लोग अक्सर समस्या नहीं मानते हैं। अगर चिंता विकार का सही समय पर उपचार न हो, तो ये कई अन्य समस्याओं को भी जन्म दे सकता है। जानिए चिंता विकार से संबंधित मिथक और तथ्य।

  1. मिथक: चिंता विकार का कब्ज या आईबीएस से कोई संबंध नहीं है।
    तथ्य: जिन लोगों को चिंता विकार की समस्या होती है, उन्हें कब्ज या आईबीएस भी हो सकता है।
    तनाव का प्रभाव पेट पर भी पड़ता है। इरिटेबल बाउल सिंड्रोम या आईबीएस की समस्या से जूझ रहे लोगों में चिंता विकार की समस्या भी हो सकती है।
    आईबीएस और चिंता के बीच संबंध तंत्रिका तंत्र से है। तंत्रिका तंत्र आंशिक रूप से कोलन को नियंत्रित करती है।
  2. मिथक: चिंता विकार को इलाज की जरूरत नहीं होती है।
    तथ्य: चिंता विकार मानसिक बीमारी है। अगर इस बीमारी का सही समय पर इलाज न किया जाए तो जटिलताएं बढ़ जाती है। चिंता विकार का अगर इलाज न किया जाए, तो व्यक्ति गंभीर कदम भी उठा सकता है।
  3. मिथक: चिंता विकार कभी ठीक नहीं होता है।
    तथ्य: अगर उचित देखभाल और उपाचार किया जाए, तो व्यक्ति में दिखने वाले चिंता के लक्षण कम हो जाते हैं या न के बराबर दिखते हैं। चिंता विकार के उपचार की मदद से मरीज को बहुत फायदा पहुंचता है।
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चिंता भय और बेचैनी के कारण पैदा होती है। रोजमर्रा के जीवन में चिंता होने स्वाभाविक है। कुछ समय के लिए चिंता करना कोई बीमारी नहीं है। तनाव के कारण चिंता होना सामान्य माना जाता है।
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चिंता विकार के कारण घबराहट या भय पैदा होना, मांसपेशियों में दर्द महसूस होना, जी मिचलाना, हाथ या पैर में झनझनाहट, सांस लेने में कठिनाई, बुरे सपने आना, मुंह सूखना, हाथों से ठंडा पसीना आना आदि लक्षण दिखाई पड़ते हैं।

चिंता के लक्षण कुछ समय तक दिखाई पड़ सकते हैं। इन लक्षणों को थेरेपी, ध्यान आदि के माध्यम से कम किया जा सकता है।

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चिंता विकार एक प्रकार का मानसिक विकार है। लंबे समय तक चिंतिंत रहने से चिंता विकार पैदा होता है। चिंता विकार के कारण किसी व्यक्ति के काम करने, अध्ययन करने और अन्य गतिविधियों में भाग लेने की क्षमता को प्रभावित होती है।
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एंग्जायटी अटैक भय या डर के एपिसोड होते हैं। अचानक चिंता किसी तनावपूर्ण स्थिति से घिरे रहने के कारण है। कोई बड़ी घटना या लंबे समय तक तनावपूर्ण जीवन अचानक चिंता को बढ़ा सकते हैं। काम का तनाव, परिवार में किसी की मृत्यु, पैसे की तंगी आदि अचानक चिंता का कारण बन सकते हैं।
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चिंताजनक विचार को नियंत्रित करना कठिन है। जब भी बेचैनी या तनाव महसूस होता है, चिंता के लक्षण नजर आने लगते हैं। चिंता के लक्षण कभी खत्म नहीं होते हैं बल्कि समय के साथ अधिक खराब हो सकते हैं। कई बार कैफीन, कुछ दवाओं का इस्तेमाल चिंता के लक्षणों को अधिक खराब कर सकता है।
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चिंता महसूस किए बिना चिंता विकार के शारीरिक लक्षण दिख सकते हैं। कुछ लक्षण जैसे कि घबराहट होना, सिरदर्द, पसीना आना आदि शारीरिक लक्षण कुछ समय के लिए दिख सकते हैं।
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चिंता के बारे में जानकारी चिंता टेस्ट के माध्यम से होती है। इस दौरान मनोचिकित्सक व्यक्ति से कुछ सवाल जैसे कि पिछले दो हफ्ते से आप कैसा महसूस कर रहे हैं, किन परिस्थितियों में अधिक डर लगता है आदि पूछते हैं।
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चिंता कई कारणों से पैदा होती है। चिंता विकार के प्रकार में सामान्यकृत चिंता विकार, पैनिक डिसऑर्डर, फोबिया, अलगांव की स्थिति आदि शामिल है। यदि आपको चिंता के लक्षण दिखाई दें तो अपने चिकित्सक से परामर्श करें।
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चिंता विकार का निदान करने के लिए डॉक्टर कोई प्रयोगशाला परीक्षण या स्कैन नहीं करते हैं। चिंता विकार का निदान करने के लिए शारीरिक स्थितियों के साथ ही विभिन्न प्रकार के लक्षणों के बारे में जानकारी ली जाती है। डॉक्टर रोगी का चिकित्सा इतिहास जानते हैं।

 

शारीरिक बीमारी के कोई लक्षण नहीं मिलने पर रोगी को मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिक के पास भेजा जा सकता हैं।

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चिंता के लक्षणों को घरेलू उपाय, थेरेपी और दवाओं के माध्यम से कम किया जा सकता जा है। चिंता विकार को पूरी तरह से ठीक करना संभव नहीं है।
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चिंता का इलाज न होने पर व्यक्ति के काम करने की क्षमता में कमी के साथ ही समाज से अलगाव भी शामिल है। साथ ही व्यक्ति आत्महत्या भी कर सकता है।
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टेंशन फ्री रहने के लिए रोजाना व्यायाम, मेडिटेशन करना चाहिए। साथ ही संतुलित आहार और अच्छी नींद लेनी चाहिए। स्वस्थ्य जीवनशैली टेंशन फ्री रहने में मदद करती है।
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चिंता विकार के लक्षण शरीर की प्रतिक्रिया के कारण दिखाई पड़ते हैं। रात में चिंता और भी बदतर हो सकती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लोग रात में अपनी समस्याओं को अधिक गंभीरता से सोचते हैं।

कभी-कभी अनिद्रा से पीड़ित लोगों को इस बात की चिंता होने लगती है कि वे सो पाएंगे या नहीं। इस कारण भी रात को चिंता अधिक बढ़ जाती है।

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Disclaimer: यहाँ दी गई जानकारी केवल शैक्षणिक और सीखने के उद्देश्य से है। यह हर चिकित्सा स्थिति को कवर नहीं करती है और आपकी व्यक्तिगत स्थिति का विकल्प नहीं हो सकती है। यह जानकारी चिकित्सा सलाह नहीं है, किसी भी स्थिति का निदान करने के लिए नहीं है, और इसे किसी प्रमाणित चिकित्सा या स्वास्थ्य सेवा पेशेवर से बात करने का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

समीक्षक

Dr. Aman Priya Khanna

Dr. Aman Priya Khanna

MBBS, DNB General Surgery, Fellowship in Minimal Access Surgery, FIAGES

12 Years Experience

Dr Aman Priya Khanna is a well-known General Surgeon, Proctologist and Bariatric Surgeon currently associated with HealthFort Clinic, Health First Multispecialty Clinic in Delhi. He has 12 years of experience in General Surgery and worke...View More

लेखक

Pranjali Kesharwani

Pranjali Kesharwani

Bachelor of Pharmacy (Banaras Hindu University, Varanasi)

2 Years Experience

She is a B Pharma graduate from Banaras Hindu University, equipped with a profound understanding of how medicines works within the human body. She has delved into ancient sciences such as Ayurveda and gained valuab...View More

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