यूरिन में पस सेल्स: नार्मल रेंज, कारण, टेस्ट, उपचार | Pus Cells in Hindi

अक्सर लोग जानना चाहते है कि पस सेल्‍स का मतलब क्या होता है? (pus cells means in hindi)। पस सेल्स  यानि मवाद कोशिकाये है और मूत्र में इन्की उपस्थिति कुछ उपयोगी जानकारी प्रदान करने में मदद करती है। 

तो आईए इस लेख में जानते हैं कि क्या होती है ये पस सेल्स (what is pus cells in urine in hindi), क्यू बनती हैं और इनके होने से हमें क्या जानकारी मिलती है? इसके अलावा विस्तार से यूरिन में पस सेल्स की नार्मल रेंज, कारण, टैस्ट और उपचार का भी आगे लेख में उल्लेख करेंगे। 

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मूत्र में पस सेल्स क्या होते है?

हमारे शरीर में जब भी संक्रमण होता है, तो उसकी प्रतिक्रिया में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) संक्रमण से लड़ने और इसे जल्दी से रोकने की कोशिश करती है। हमारी रक्षा प्रणाली में व्‍हाइट ब्‍लड सेल्‍स (सफेद रक्त कोशिकाएं) की विशेष भूमिका होती है। 

जैसे ही संक्रमण होता है, वैसे ही श्वेत रक्त कोशिकाएं (डब्ल्यूबीसी) रक्त वाहिकाओं की दीवारों के माध्यम से संक्रमण के क्षेत्र में जाती हैं और क्षतिग्रस्त ऊतक में ईकट्ठी हो जाती हैं इसी प्रक्रिया के दौरान पस सेल्स या मवाद कोशिकाये बनती है। सफेद रक्त कोशिकाएं, मृत ऊतक और बैक्टीरिया के मिश्रण को पस सेल्स कहते है। यह ज्यादातर किसी गंभीर बीमारी का संकेत देते हैं।

मूत्र या पेशाब में पस सेल्स होने का मतलब है कि पेशाब में सफेद रक्त कोशिकाओं (ल्यूकोसाइट्स) का होना । आम तौर पर, मूत्र में कुछ मात्रा में मवाद कोशिकाएं मौजूद होती हैं। हालांकि, यदि मूत्र में मवाद की कोशिकाएं अपनी सामान्य सीमा से अधिक मौजूद हैं, तो यह एक चिकित्सा स्थिति को इंगित करता है जिसे पायूरिया कहा जाता है ।

पेशाब में पस सेल्स कि उपस्तिथि मूत्रपथ के संक्रमण और अन्य समस्याओं का निदान करने के लिए डॉक्टरों द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण संकेतक है।

मूत्र में पस सेल्स के प्रकार

पायूरिया को जांच में बकटेरिया कि उपस्तिथि के आधार पर  निम्नलिखित प्रकार मे विभाजित किया गया है:

  1. पायुरिया: जब भी पायुरिया शब्द का इस्तेमाल होता है, तो उसका मतलब है, कि मूत्र में पस सेल्स हैं। अगर पस सेल्स कि वजह बेकटेरियल संक्रमण है, तो उसे पायुरिया कहते हैं। 
    1. यह बिना किसी लक्षण के हो सकता है, या फिर अंतर्निहित मूत्र पथ के संक्रमण (यूटीआई) की ओर संकेत कर सकता है। 
    2. एक बात जरूरी है कि अगर सेंट्रीफ्यूग किए गए मूत्र के नमूने में 4 से अधिक मवाद कोशिकाएं/एचपीएफ होती  है, तो यह पायुरिया मूत्र पथ के संक्रमण निर्धारित करता है।
  2. स्टेराइल पायूरिया: स्टेराइल पायूरिया में आपके पेशाब में सफेद रक्त कोशिकाएं होती हैं, लेकिन आपके डॉक्टर को किसी भी रूटीन कल्चर पर संक्रमण के प्रमाण नहीं मिलता या बैक्टीरिया का पता नहीं लगता है।

आप इसे भी पढ़ सकते हैं: Pus Cells in Urine

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मूत्र में पस सेल्स के प्रकार

पायूरिया को जांच में बकटेरिया कि उपस्तिथि के आधार पर  निम्नलिखित प्रकार मे विभाजित किया गया है:

पायुरिया: जब भी पायुरिया शब्द का इस्तेमाल होता है, तो उसका मतलब है, कि मूत्र में पस सेल्स हैं। अगर पस सेल्स कि वजह बेकटेरियल संक्रमण है, तो उसे पायुरिया कहते हैं।   

  1. यह बिना किसी लक्षण के हो सकता है, या फिर अंतर्निहित मूत्र पथ के संक्रमण (यूटीआई) की ओर संकेत कर सकता है। 
  2. एक बात जरूरी है कि अगर सेंट्रीफ्यूग किए गए मूत्र के नमूने में 4 से अधिक मवाद कोशिकाएं/एचपीएफ होती  है, तो यह पायुरिया मूत्र पथ के संक्रमण निर्धारित करता है।

स्टेराइल पायूरिया: स्टेराइल पायूरिया में आपके पेशाब में सफेद रक्त कोशिकाएं होती हैं, लेकिन आपके डॉक्टर को किसी भी रूटीन कल्चर पर संक्रमण के प्रमाण नहीं मिलता या बैक्टीरिया का पता नहीं लगता है।

यूरिन में पस सेल्स के लक्षण

यूरिन में पस सेल्स (pus cells in urine hindi) या पायुरिया का मतलब जानने के बाद यह भी जानना जरूरी है कि अगर किसी व्यक्ति को पायुरिया है, तो उसके लक्षण और संकेत क्या होंगे? 

मूत्र संक्रमण में अक्सर पेशाब को देखने में धुंधलापन सा नजर आता है या उसमे दुर्गंध आती है, जबकि सामान्य स्तिथि में पेशाब साफ या हल्के पीले रंग का होता है। पेशाब में गाढ़ा सा पस, फीका सा रंग या धुंधलापन, पायुरिया के सबसे आम लक्षणों में से है। इसके अलावा मरीज को निम्नलिखित तकलीफ हो सकती हैं जैसे:

  1. पेट के निचले हिस्से में दर्द, या श्रोणि क्षेत्र में दर्द
  2. श्रोणि के निचले हिस्से में दबाव महसूस करना 
  3. बार-बार पेशाब करने की जरूरत होना 
  4. एकदम अचानक पेशाब करने की जरूरत महसूस होना 
  5. पेशाब का रिसाव (इँकोन्टीनेंस)
  6. पेशाब करते समय दर्द 
  7. पेशाब में रक्त आना 
  8. बुखार
  9. जी मिचलाना और उल्टी

यूरिन में पस सेल्स के कारण और जोखिम कारक

यूरिन में पस सेल्स के पाए जाने के कई विभिन्न कारण हो सकते हैं जो कि एक साधारण मूत्र संक्रमण (यूटीआई) से लेकर असामान्य यौन संक्रमित संक्रमण (एसटीआई) तक हो सकते हैं। मूत्र संक्रमण (यूटीआई) पायुरिया का सबसे आम कारण है। अन्य कारणों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:

  1. यौन संक्रमित संक्रमण (एसटीआई) और एसटीडी संक्रमण: 
    1. गोनोरिया (गोनोरिया एक बेकटेरियल संक्रमण होता है जो “नीसेरिया गोनोरिया” नामक जीवाणु से संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाने की वजह से होता है।)
    2. हुमन पेपिलोमा वायरस (एचपीवी)
    3. सिफलिस (एक संभावित जीवन-धमकाने वाली स्थिति जो तब होती है जब शरीर की संक्रमण के प्रति प्रतिक्रिया अपने स्वयं के ऊतकों और अंगों को नुकसान पहुंचाती है)
    4. ह्यूमन इम्यूनोडिफीसिअन्सी वायरस (एचआईवी) 
  2. वायरल संक्रमण जैसे एडेनोवायरस 
  3. इंटरस्टीशियल सिस्टिटिस (दर्दनाक मूत्राशय सिंड्रोम)
  4. न्यूमोनिया (यदि बैक्टीरिया, वायरल या फंगल संक्रमण श्वसन प्रणाली को प्रभावित करता है और उसकी वजह से फेफड़ों मे सूजन और तरल पदार्थ के जमा होने को निमोनिया कहते है)
  5. तपेदिक (टूबर्क्यूलोसस) 
  6. सेप्सिस (अगर किसी संक्रमण कि वजह से शरीर की अत्यधिक प्रतिक्रिया होती है तो एक जानलेवा स्तिथि बन जाती है, जिसकी वजह से शरीर के अंगों और उत्तकों को नुकसान पहुच सकता है।)
  7. गुर्दे की पथरी
  8. लंबे समय तक कुछ प्रकार की दवाओं का उपयोग भी यूरिन में पस सेल्स का कारण हो सकता है, जैसे एस्पिरिन, इबुप्रोफेन, पेनिसिलिन एंटीबायोटिक्स आदि।

वैसे तो पायुरिया किसी को भी हो सकता है, परंतु पायुरिया होने की अधिक संभावना इन में ज्यादा होती है: 

  1. महिलाओ में यू टी आई होने की संभावना ज्यादा होती है। 
  2. अगर आपकी उम्र 45 से अधिक हैं।
  3. अगर रजोनिवृत्ति के लक्षण हैं।

यूरिन में पस सेल्स का परीक्षण

पेशाब मे पस सेल्स का परीक्षण यूरीनेलीसिस (urinalysis) नामक टेस्ट के द्वारा किया जाता है; या फिर आप यह कह सकते हैं कि पायुरिया के निदान के लिये यूरीनेलीसिस किया जाता है। यूरिन में पस सेल्स के निदान में निम्नलिखित चरण शामिल हैं:

  1. मूत्र का नमूना प्राप्त करना/संग्रह करना: मूत्र की जांच के लिए सबसे पहला कदम है, मूत्र का सही नमूना प्राप्त करना। आमतौर पर जननांग क्षेत्र को ऐन्टिसेप्टिक से साफ करने के बाद एक क्लीन-कैच मिडस्ट्रीम मूत्र का नमूना मरीज द्वारा एकत्र किया जाता है।
    1. नमूना कब प्राप्त करें: "सुबह के सबसे पहले मूत्र" के एकत्र किए गए नमूने, पेशाब में पस सेल्स के परीक्षण करने के लिए सबसे अच्छे प्रतिनिधि माने जाते हैं। मूत्राशय में रात भर जमा मूत्र अधिक गाढ़ा (कॉनसेन्टरटेड) होता है, और उन पदार्थों की बहुत कम (ट्रेस) मात्रा का पता लगाने की अनुमति देता है जो अधिक पतला नमूनों में मौजूद नहीं हो सकते हैं। 
    2. नमूना कैसे प्राप्त करें: परीक्षण के लिए एक अच्छा नमूना प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाते हैं:
      1. परीक्षण और प्रक्रिया के लिए तैयारी: नमूना एकत्र करने से पहले, स्वास्थ्य कर्मी माइक्रोबायोटा ("क्लीन-कैच" विधि) से संदूषण की संभावना को कम करने के लिए रोगियों को स्पष्ट निर्देश देंगे। 
      2. अधिकांश मूत्र संग्रह किट में संग्रह से पहले मूत्रमार्ग क्षेत्र को पोंछने के लिए एक स्टेराइल (जीवाणुरहित) हल्का नम तौलिये के साथ एक ढक्कन और स्टेराइल कंटेनर शामिल होता है, यदि तोलिया नहीं है, तो मूत्र इकट्ठा करने से पहले रूई या टॉयलेट टिश्यू और/या नल के पानी और साबुन का उपयोग किया जा सकता है। 
      3. इसके बाद, पेशाब में पस सेल्स के परीक्षण के लिए रोगी को पहले मूत्र की थोड़ी मात्रा को शौचालय में खाली करना चाहिए और बाद में कंटेनर को मूत्र के प्रवाह की मध्य-धारा में रखना चाहिए। सटीक विश्लेषण के लिए लगभग 15 एमएल से 30 एमएल मूत्र पर्याप्त होता है। 
  2. इसके बाद इस नमूने को माइक्रोस्कोप के नीचे परीक्षण और देखने के लिए तुरंत ही प्रयोगशाला में भेजा जाता है।
    1. नमूना की जांच कब की जाती? मूत्र मे उपस्थित कुछ मूत्र घटकों (कोशिकाओं, कास्ट और क्रिस्टल) की अस्थिरता के कारण संग्रह के पहले घंटे के भीतर मूत्र की आदर्श रूप से जांच की जानी चाहिए। यदि संभव न हो, तो नमूने को 24 घंटे तक 4 डिग्री सेल्सियस पर प्रशीतित किया जाना चाहिए, जो अपघटन प्रक्रिया को धीमा कर देगा।
      24 घंटे से अधिक पुराने किसी भी नमूने का यूरिनलिसिस के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता है। इस पेशाब के नमूने में माइक्रोस्कोप के नीचे परीक्षण करते हुए, पस सेल्स की उपस्थिति की जाँच की जाती है। एक सामान्य मूत्र के नमूने में आमतौर पर मवाद कोशिकाएं मौजूद नहीं होती हैं, या बहुत कम मात्रा में होती है। 
  3. यूरिन में पस सेल्स की मात्रा निर्धारित करना: पस सेल्स को हाई पावर फील्ड माइक्रोस्कोप (एचपीएफ) के नीचे गिना जाता है, और मूत्र से मवाद कोशिकाओं को माइक्रोस्कोप के प्रति एच पी एफ में कोशिकाओं की संख्या के रूप में रिपोर्ट किया जाता है। 
  4. इसके बाद चिकित्सक कि सलाह अनुसार पेशाब के नमूने पर एक कल्चर और एन्टीबीओटिक  संवेदनशीलता परीक्षण किया जा सकता है, और अगर स्टेराइल पयुरिया है, तो नमूने को टी बी कि जांच के लिए ए एफ बी (ऐसिड फास्ट बेक्टेरिया) स्टेनिंग, या कैंसर के लिए युरिन साइटोलजी  के लिए भेज दिया जाता है। इसके अलावा मरीज के लक्षण के हिसाब से जेनिटोयुरेनेरी स्क्रीनिंग, या अल्ट्रसाउन्ड स्कैन भी किया जा सकता है। 

परीक्षण के परिणाम और उसके  यूरिन में पस सेल्स संबंधित संकेत

मूत्र से मवाद कोशिकाओं की सामान्य सीमा (नॉर्मल रेंज) 0-5 प्रति एचपीएफ (हाई पावर फील्ड माइक्रोस्कोप) है। अगर मूत्र नमूने में मवाद कोशिकाओं की उपस्थिति ≥ 5 प्रति एचपीएफ हो तो, मूत्र पथ के संक्रमण के निदान मे मदद करती है। 

इसके अलावा यूरिन में पस सेल्स का होना या मूत्र पथ के संक्रमण का अनुमान मूत्र के नमूने के अन्य परीक्षण से पता चलता है जैसे:

  1. परीक्षण:  पेशाब का रंग ।
    1. सामान्य (नॉर्मल):  साफ, जिसके आरपार दिख सके ।
    2. यूरिन में पस सेल्स का निदान:  धुंधला सा दिखने वाला पेशाब जो श्वेत रक्त कोशिकाएं और बैक्टीरिया की वजह से हो सकता है। 
  2. परीक्षण: पेशाब की गंध
    1. सामान्य (नॉर्मल): "यूरिनोइड" ।
    2. यूरिन में पस सेल्स का निदान: तीखा या दुर्गन्धयुक्त, अमोनिया जैसी गंध आती है ।  
  3. परीक्षण: मूत्र रासायनिक निष्कर्ष देखने के लिए डिपस्टिकस टेस्ट (ल्यूकोसाइट एस्टेरेस) ।
    1. सामान्य (नॉर्मल): नकरात्मक (नेगटिव) ।
    2. यूरिन में पस सेल्स का निदान: सकारात्मक (पोसीटिव) क्योंकि  ल्यूकोसाइट एस्टरेज़ एक एंजाइम है जो अधिकांश श्वेत रक्त कोशिकाओं में मौजूद होता है। 
  4. परीक्षण: माइक्रोस्कोप के नीचे परीक्षण । 
    1. सामान्य (नॉर्मल): कुछ पस सेल्स । 
    2. यूरिन में पस सेल्स का निदान: डब्ल्यूबीसी की बढ़ी हुई संख्या और/या ल्यूकोसाइट एस्टरेज़ के लिए एक सकारात्मक परीक्षण एक संक्रमण का संकेत दे सकता है । 

यूरिन में पस सेल्स की रोकथाम

पेशाब मे पस सेल्स की रोकथाम के लिए मूत्र पथ के संक्रमण को रोककर और यौन संक्रमित संक्रमण (एस टी आई) की संभावना को कम करके पायुरिया को रोकने में मदद की जा सकती हैं। एस टी आई ज्यादातर, असुरक्षित यौन संबंध बनाने की  वजह से हो सकतते हैं।

 यूटीआई को रोकने में मदद करने के लिए निम्नलिखित युक्तियों का उपयोग किया जा सकता है:

  1. जितना हो सके अच्छी स्वच्छता का अभ्यास करें। 
    1. महिलाओं को पेशाब करने के बाद आगे से पीछे की ओर एक साफ टिशू से पोंछना चाहिए। 
    2. मासिक धर्म के समय नियमित रूप से अपने पैड को स्वच्छता रखने के लिए बदलना चाहिए। 
    3. अपनी योनि के आसपास की त्वचा को नियमित रूप से साफ पानी और हल्के साबुन से धोना चाहिए। 
  2. दिन भर खूब पानी और तरल पदार्थ का सेवन करे: अच्छी मात्रा में पानी या तरल पदार्थ लेने से शरीर से विषाक्त पदार्थ और मूत्र पथ से बैक्टीरिया को "फ्लश आउट" करने में मदद मिलती है।
  3. आरामदायक सूती कपड़े पहनें: ध्यान रहे कि ढीले और सूती कपड़े पहनें जो जननांग क्षेत्र को सूखा रखने में मदद करते हैं और बैक्टीरिया को आपके मूत्र पथ में बढ़ने से रोकने में मदद करते हैं। 
  4. संभोग के बाद पेशाब जरूर जाएं:  संभोग के बाद पेशाब करने से मूत्र पथ से बैक्टीरिया को साफ करने में मदद मिलती है।
  5. यौन संक्रमित संक्रमण की वजह से पायुरिया होने की संभावना को कम करने के लिए नियमित रूप से एसटीआई के लिए परीक्षण करवाएं और संभोग करते वक्त कन्डोम का प्रयोग करे, खासकर तब जब आप यौन रूप से काफी सक्रिय हैं। 

विशेषज्ञो के अनुसार भोजन, आहार और पोषण मूत्राशय के संक्रमण को रोकने या उसका इलाज करने में कोई भूमिका नहीं निभाते हैं। हालांकि कुछ शोधों से पता चलता है कि क्रैनबेरी जूस, अर्क या इसकी गोलियां मूत्र पथ  के संक्रमणों को रोकने में कुछ हद तक मदद कर सकती हैं।

यूरिन में पस सेल्स का उपचार

पायुरिया या यूरिन मे पस सेल्स का उपचार किस वजह से पस सेल्स बनी है, इस पर निर्भर करता है। जब आप अपने डॉक्टर से लक्षण और तकलीफ का विस्तार से विवरण करते हो तो टेस्ट के माध्यम से यूरिन मे पस सेल्स का निदान किया जाता है और उपचार निर्धारित किया जाता है। 

अक्सर यूटीआई, बैक्टीरियल एसटीआई और तपेदिक (टूबर्क्यूलोसिस) के इलाज के लिए एंटीबायोटिक्स दिए जाते हैं। इन दवाओ को लेने का समय, कितनी बार लेनी है और कितने समय तक लेनी है, इसके बारे में अपने डॉक्टर से जरूर समझ  ले, क्योंकि एंटीबायोटिक दवाओं का अपना पूरा कोर्स खत्म करना महत्वपूर्ण है, भले ही आप कोर्स खत्म होने से पहले ही बेहतर महसूस करने लगे। यदि आप नहीं करते हैं, तो आपके पायरिया का कारण वापस आ सकता है और इलाज करना अधिक कठिन हो सकता है।

मूत्र में मवाद कोशिकाओं की जटिलताए

वैसे तो ज्यादातर मूत्र में मवाद कोशिकाएं पाया जाना चिंता का विषय नहीं होती है। अगर बहुत मात्रा में यूरिन में पस सेल्स बढ़ जाती हैं, तो हालांकि, इसका इलाज करना सरल है, परंतु कुछ मरीजों में अगर समय पर इलाज नहीं कराया जाए तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

अनुपचारित पायुरिया निमलिखित गंभीर स्थितियों को जन्म दे सकता है, जैसे:

  1. गुर्दे की क्षति: यदि यू टी आई का ठीक से समय पर इलाज नहीं किया जाता है, तो संक्रमण कि वजह से गुर्दे को नुकसान पहुंचा सकता है, खासकर जो मूत्र संक्रमण बढ़ी हुई प्रोस्टेट ग्रंथि (पुरुषों में) या गुर्दे की पथरी जैसी समस्याओं कि वजह से होता है। 
  2. आवर्ती संक्रमण (रेकुररेन्ट इन्फेक्शन): यदि मूत्रपथ संक्रमण का ठीक से इलाज नहीं किया जाता है, मतलब चिकटसक द्वारा दी गई एन्टीबीओटिक का पूरा कोर्स नहीं लिया जाता है, तो इससे बार-बार संक्रमण हो सकता है और इलाज करना मुश्किल हो सकता है। 
  3. सेप्सिस: मूत्रपथ का संक्रमण जानलेवा सेप्सिस का कारण बन सकता है बहुत सारे अंगों की शिथिलता, विफलता और यहां तक ​​​​कि मृत्यु का कारण बन सकता है। 

डॉक्टर से कब सलाह लें?

हालांकि यूरीन मे कुछ पस सेल्स सामान्य रूप से पाए जाते हैं। पर कुछ स्तिथियों में आपको तुरंत ही डॉक्टर से मिलना चाहिए जैसे: 

  1. अगर पेशाब में कोई बदलाव नजर आता है, जैसे किसी तरह कि दुर्गंध, धुंधलापन, या फिर पेशाब में रक्त आना। 
  2. अगर यूटीआई या एसटीआई के लक्षण महसूस करते हैं। 
  3. यदि संक्रमण गुर्दे तक फैल कर गंभीर हो जाता है, तो आपको निम्न तकलीफ हो सकती है जिसके लिए तुरंत डॉक्टर से मिले 
    1. पीठ के निचले हिस्से में गंभीर दर्द
    2. बुखार और ठंड लगना
    3. जी मिचलाना और उल्टी होना
  4. अगर यूटीआई या एसटीआई के निदान हो जाने के बाद लक्षण ज्यादा खराब हो जाते हैं, तो डॉक्टर के पास फिर से जाना चाहिए।

गर्भावस्था में पायरिया

गर्भावस्था के दौरान मूत्र पथ के संक्रमण (यूटीआई) सबसे आम संक्रमण हैं। शारीरिक और हार्मोनल परिवर्तनों के कारण गर्भवती महिलाओं को यूटीआई का खतरा बढ़ जाता है और एक बार संक्रमण हो जाता है तो यह अधिक गंभीर हो सकता है क्योंकि बैक्टीरिया, किडनी में जाने की संभावना अधिक हो जाती है। 

गर्भावस्था के दौरान यूटीआई होने कि वजह से गर्भवती महिला को निम्न समस्याओ का सामना करना पड़ सकता है जैसे:  

  1. उच्च रक्तचाप 
  2. बच्चे की समय से पहले डिलीवरी
  3. जन्म के समय बच्चे का कम वजन होना (एल बी डब्लू) 

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निष्कर्ष

अब तो आप जान ही गए होंगे की यूरिन में पस सेल्स का अर्थ क्या है? ध्यान रखिए,  जब आपके पेशाब में सफेद रक्त कोशिकाएं या मवाद होता है, उसे पायुरिया कहते है । इसके अलावा पेशाब का धुंधला दिखना या दुर्गंध आना संक्रमण होने के संकेत दे सकता है। यदि आप अपने पेशाब में कोई बदलाव देखते हैं, तो शीघ्र ही अपने डॉक्टर से संपर्क करें। वे पायुरिया का निदान करते हुए इसका कारण निर्धारित करके प्रभावी उपचार प्रदान करेंगे । 

अगर आपको किसी वजह से चिंता हो रही है, और समझ नहीं आ रहा कि किस तरह से  पस सेल्स के बारे मे पता लगाए, तो देर ना करें, आज ही आप HexaHealth पर प्रोफेशनल केयर टीम से संपर्क कर सकते हैं और समस्त जानकारी प्राप्त करें। यदि आप मवाद कोशिकाओं (pus cells means in hindi) या अन्य परीक्षण या बीमारी से संबंधित जानकारी के बारे में अधिक जानना चाहते हैं तो आप हमारी वेबसाइट HexaHealth पर भी जा सकते हैं।

पाइल्स पर अधिक पढ़ने के लिए आप नीचे दिए गए लिंक पर जा सकते हैं:

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Epithelial Cells in Urine  

अधिकतर पूछे जाने वाले सवाल

मवाद एक गाढ़ा, और फीका सा दिखने वाला तरल पदार्थ है जिसे आपका शरीर संक्रमण से लड़ने में मदद करने के लिए बनाता है। पस में सफेद रक्त कोशिकाएं, मृत ऊतक और बैक्टीरिया होते हैं।
यूरिन में पस सेल्स होने को पायुरिया कहते हैं। इस स्थिति में व्यक्ति के मूत्र (पेशाब) में सफेद रक्त कोशिकाओं (ल्यूकोसाइट्स) या मवाद का उच्च स्तर होता है।
पस सेल्स को हिन्दी में मवाद कोशिकाये कहते हैं। जब हमारे शरीर में संक्रमण होता है, तो उसकी प्रतिक्रिया में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमण से लड़ने और इसे जल्दी से रोकने की कोशिश करती है, और इसी प्रतिक्रिया के दौरान मवाद बनता है।
पेशाब में कुछ पस सेल्स का होना सामान्य होता है। मूत्र से मवाद कोशिकाओं की सामान्य सीमा (नॉर्मल रेंज) 0-5 प्रति एचपीएफ (हाई पावर फील्ड माइक्रोस्कोप) है।
यदि आपके यूरिन में पस सेल्स या फिर प्रति घन मिलीमीटर पेशाब में 10 या अधिक श्वेत रक्त कोशिकाएं हैं, तो इसका मतलब है कि आपको पायुरिया है, और इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।
हाँ, यह सही है कि यूरिन में पस सेल्स 2/4 एचपीएफ सामान्य है। मूत्र से मवाद कोशिकाओं की सामान्य सीमा (नॉर्मल रेंज) 0-5 प्रति एचपीएफ (हाई पावर फील्ड माइक्रोस्कोप) है।
नहीं, यूरिन में पस सेल्स 15/20 एचपीएफ सामान्य नहीं है। अगर किसी व्यक्ति में प्रति घन मिलीमीटर पेशाब में 10 या अधिक श्वेत रक्त कोशिकाएं हैं, वह असामान्य माना जाता है।
80-100 यूरिन में पस सेल्स का होना संकेत देता है की व्यक्ति को मूत्र संक्रमण की तकलीफ है। ऐसे में आपके डॉक्टर आपको एंटीबायोटिक्स देते हैं और दवाओं का अपना पूरा कोर्स खत्म करने की सलाह देते है।
यूरिन में पस सेल्स की वजह अक्सर यूटीआई, बैक्टीरियल एसटीआई और तपेदिक हो सकता है, जिसके इलाज के लिए एंटीबायोटिक्स दिए जाते हैं। इन दवाओ का पूरा कोर्स खत्म करना महत्वपूर्ण है, वरना ऐन्टाइबाइआटिक रेसिस्टेंस की तकलीफ हो सकती है।
पस सेल्स का मुख्य कारण संक्रमण होता है, इसके अलावा शरीर में पस सेल्स वायरस की वजह से भी बढ़ सकते हैं। कुछ दवाओ का लंबे समय तक इस्तेमाल भी पस सेल्स को शरीर मे बढ़ सकता है।
मूत्र में मवाद कोशिकाएं आम तौर पर सामान्य होती हैं, लेकिन बड़ी संख्या में मवाद कोशिकाएं मूत्र पथ के संक्रमण का संकेत दे सकती हैं। कम पस सेल्स होने का मतलब है कि इलाज का असर हो रहा है।
पेशाब या यूरिन मे पस सेल्स का परीक्षण यूरीनेलीसिस नामक टेस्ट के द्वारा किया जाता है। पेशाब के नमूने को माइक्रोस्कोप के नीचे परीक्षण करके पस सेल्स का पता लगाया जाता है।
पस सेल्स को नियंत्रित करने के लिए अच्छी स्वच्छता का अभ्यास करें, खूब पानी पिए, और संभोग करने के बाद पेशाब जरूर करें क्योंकि सेक्स के बाद पेशाब करने से आपके मूत्र पथ से बैक्टीरिया को साफ करने में मदद मिलती है। इनसे भी अगर नियंत्रण ना हो तो डॉक्टर से एंटिबयोटिक्स दवाओ के लिए संपर्क करें।
पेशाब में कुछ पस सेल्स का होना सामान्य होता है जिसकी सामान्य सीमा (नॉर्मल रेंज) 0-5 प्रति एचपीएफ  होती है। परंतु पायुरिया की स्तिथि में आपके मूत्र (पेशाब) में पस सेल्स का स्तर बढ़ जाता है जो संक्रमण या यूरिन इन्फेक्शन की तरफ संकेत करता है। ऐसी स्तिथि में तुरंत ही डॉक्टर से मिलना चाहिए।

सन्दर्भ

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Updated on : 25 August 2023

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