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पिगमेंटेशन के लक्षण, कारण और इलाज - Pigmentation in Hindi

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Written by Hexahealth Care Team, last updated on 4 July 2024| 7 min read
पिगमेंटेशन के लक्षण, कारण और इलाज - Pigmentation in Hindi

Quick Summary

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चमकदार, साफ सुथरी, बिना दाग धब्बे वाली त्वचा हर लड़की और महिला का सपना होता है। पर आजकल की भाग दौड़ वाली जीवनशैली में त्वचा पर काले धब्बे या असमतल रंग होना एक सामान्य सी बात हो गई है। और अगर किसी से सवाल किया जाए कि त्वचा पर क्या हुआ है, तो जवाब मिलता है, पिगमेंटेशन (त्वचा का रंजकता)। तो आइए जाने कि पिगमेंटेशन (pigmentation in hindi) क्या होता है और क्यों होता है?

पिगमेंटेशन या त्वचा रंजकता किसी भी व्यक्ति की त्वचा के रंग को दर्शाता है। पिगमेंटेशन या त्वचा पिग्मन्टैशन के बदलाव की वजह से त्वचा के रंग पर असर पड़ सकता है। आईए इस लेख के माध्यम से पिगमेंटेशन के लक्षण, प्रकार, कारण, निदान, रोकथाम, दवा, उपचार और अन्य महत्वपूर्ण विवरण के बारे में जानते हैं।

रोग का नाम पिगमेंटेशन
लक्षण काले, भूरे, लाल, गुलाबी या  ग्रे रंग के धब्बे, त्वचा के ऊपर निशान/पैच
कार ण   त्वचा की सूजन, आनुवंशिकी, धूप के संपर्क में आना      
नि  दान  दृश्य परीक्षा, चिकित्सा इतिहास की समीक्षा, लकड़ी का दीपक परीक्षण   
इलाज कौन करता है डर्मेटोलॉजिस्ट (त्वचा विशेषज्ञ)    
उप चार के विकल्प  रासायनिक पीलस, क्रायोथेरेपी, लेजर त्वचा रीसरफेसीन्ग, पिग्मेंटेड लिसन के लिए लेजर उपचार 

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पिगमेंटेशन क्या होता है?

पिगमेंटेशन या रंजकता  (त्वचा का रंग),  त्वचा में मेलेनिन नामक वर्णक की मात्रा से त्वचा का रंग निर्धारित होता है। 

  1. मेलेनिन, मेलानोसाइट्स नामक विशेष कोशिकाओं द्वारा मानव शरीर मे निर्मित होता है। 
  2. इसी वर्णक की वजह से व्यक्ति की त्वचा, बालों और आंखों का विभिन्न रंग निर्धारित होता है। 

जब ये मेलानोसाइट्स कोशिकाएं क्षतिग्रस्त या अस्वस्थ हो जाती हैं, तो यह मेलेनिन के उत्पादन को प्रभावित करती हैं और मेलेनिन उत्पादन में परिवर्तन विकार पैदा कर सकता है। उदारहन के लिए:  जब मेलेनिन बेहद कम हो जाए तो त्वचा पीली या सफेद दिखेगी।

पिगमेंटेशन के प्रकार

पिगमेंटेशन या त्वचा का रंग, मेलेनिन की मात्रा पर निर्भर करता है। इसी आधार पर त्वचा रंजकता को निम्नलिखित विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है।

पिगमेंटेशन के प्रकार मेलेनिन की मात्रा
हाईपरपिगमेंटेशन  मेलेनिन की असामान्य रूप से अधिक मात्रा हो जाती है। 
हाइपोपिगमेंटेशन  मेलेनिन की असामान्य रूप से कम मात्रा होती है।
रंगहीनता (डिपिगमेंटेशन ) मेलेनिन पूरी तरह खत्म हो जाता है। 

ऊपर बताए गए रंजकता (pigmentation in hindi) के प्रकार मे से कुछ, कभी-कभी त्वचा के सिर्फ एक हिस्से (पैच) को प्रभावित करते हैं, और कुछ दूसरे प्रकार, किसी व्यक्ति के पूरे शरीर को भी प्रभावित कर सकते हैं। 

यदि किसी व्यक्ति का शरीर सामान्य से अधिक मात्रा मे मेलेनिन बनाता है, जिसे हाईपरपिगमेंटेशन (hyperpigmentation in hindi meaning) कहते है, तो इसकी वजह से उस व्यक्ति की त्वचा सांवली हो जाती है और उसके विपरीत यदि किसी व्यक्ति का शरीर बहुत कम मेलेनिन बनाता है, तो त्वचा का रंग सामान्य से हल्का हो जाता है।

पिगमेंटेशन के लक्षण

पिगमेंटेशन के लक्षण क्या है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति को किस प्रकार का पिगमेंटेशन है। जैसा कि:

  1. हाईपरपिगमेंटेशन (hyperpigmentation in hindi) में अक्सर त्वचा के कुछ क्षेत्र दूसरों की तुलना में गहरे रंग के होते हैं। इन धब्बों को कभी-कभी उम्र के धब्बे, सूरज के धब्बे या यकृत के धब्बे भी कहा जाता है। 
    1. ज्यादातर हाईपरपिगमेंटेशन में काले, भूरे, लाल, गुलाबी या ग्रे रंग के धब्बे त्वचा पर दिखते है। 
    2. डार्क स्पॉट्स के अलावा, हाइपरपिग्मेंटेशन के कोई लक्षण नहीं होते हैं। 
  2. हाइपोपिगमेंटेशन (hypopigmentation) में त्वचा का रंग सामान्य से हल्का होता है। ऐसे निशान/पैच त्वचा के ऊपर बन जाते है जो आसपास की सामान्य त्वचा की तुलना में कम रंजकता से जुड़े हैं। हाइपोपिगमेंटेड मैक्युल त्वचा के लिज़न में सबसे ज्यादा सामने आने वाली तकलीफ है, जो व्यक्ति को डॉक्टर के क्लिनिक तक ले जाती है। 
  3. डिपिगमेंटेशन में मेलेनिन पूरी तरह से खत्म हो जाता है जिसकी वजह से त्वचा सफेद होती है। विटिलिगो नामक त्वचा की स्तिथि में व्यापक रूप से डिपिगमेंटेशन होता है। 

पिगमेंटेशन के कारण और जोखिम कारक

जैसा कि ऊपर के लेख से यह पता लग गया है कि मेलेनिन वर्णक ही त्वचा के रंग और पिगमेंटेशन के लिए जिम्मेदार होता है। मेलेनिन को बनानी वाली मेलानोसाइट्स कोशिकाएं अगर क्षतिग्रस्त या अस्वस्थ हो जाती हैं, तब मेलेनिन का उत्पादन प्रभावित होता हैं।

आइए देखते है किस कारण से पिगमेंटेशन होता है:

  1. हाईपरपिगमेंटेशन के कारणों में निम्नलिखित शामिल हैं:
    1. त्वचा की सूजन (खासकर जो हाईपरपिगमेंटेशन त्वचा की क्षति के बाद होती है, जैसे मुँहासे, कट या जलन के बाद)
    2. कुछ दवाओं के उपयोग के बाद (जैसे मिनोसाइक्लिन, कुछ कैंसर कीमोथेरपी, और गर्भ निरोधक या जन्म नियंत्रण की गोलियाँ, और वे दवाएं जो प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता पैदा करती हैं। )
    3. हार्मोन प्रणाली के रोग जैसे एडिसन रोग जिसमे शरीर सही मात्रा मे कॉर्टिसॉल का निर्माण नहीं कर पाता है। 
    4. आनुवंशिकी (जेनेटिक्स), जैसे अगर परिवार मे अगर किसी को झाईया है तो इसका असर परिवार में दूसरों पर भी आ सकता है, जैसे बेटा, बेटी, आदि।  
    5. हेमोक्रोमैटोसिस (लौह अधिभार)
    6. धूप के संपर्क में आने से होने वाली त्वचा की क्षति (इन धब्बों को अक्सर सोलर लेंटिगाइन कहा जाता है)। 
    7. गर्भावस्था (मेलास्मा, या गर्भावस्था के दौरान निशान)
    8. कुछ जन्म चिह्न
    9. थायराइड विकार इन कारणों की वजह से हाईपरपिगमेंटेशन हो सकता है और आपकी त्वचा का रंग गहरा हो सकता है। 
  2. हाइपोपिगमेंटेशन के कारणों में निम्नलिखित शामिल हैं:
    1. त्वचा की सूजन
    2. कुछ फंगल संक्रमण (जैसे टिनिया वर्सीकोलर)
    3. पिट्रीएसिस अल्बा (सामान्य, सौम्य त्वचा विकार जो ठीक तराजू के साथ गोल या अंडाकार हाइपोपिगमेंटेड घावों जैसा दिखता है और मुख्य रूप से बच्चों और किशोरों में होता है।)
    4. सफेद दाग
    5. कुछ दवाएं
    6. त्वचा की स्थिति को इडियोपैथिक गट्टेट हाइपोमेलानोसिस कहा जाता है, जो धूप में उजागर क्षेत्रों जैसे कि बाहों में होता है
    7. कुछ जन्म चिह्न
    8. रसायन की वजह से सूजन- सीसा (लेड)आधारित सौंदर्य प्रसाधन, त्वचा को ब्लीच करने वाले पदार्थ जैसे हाइड्रोक्विनोन आदि
    9. सूजन के बाद होने वाले बदलाव (पोस्ट-इन्फ्लैमटोरी परिवर्तन) 
      1. किसी भी त्वचीय सूजन की स्थिति के बाद हुए परिवर्तन जैसे लाइकेन स्ट्रेटस, एटोपिक डर्मेटाइटिस 
      2. कुछ प्रक्रियाएं (जैसे, क्रायोथेरेपी, डर्माब्रेशन) 
      3. विविध कारण (जैसे, जलना इत्यादी) 
  3. विटीलिगों में डिपिगमेंटेशन होता है जहां मेलेनिन पूरी तरह से खत्म हो जाता है और इसके कारण निम्न हो सकते हैं: 
    1. अत्यधिक तनाव जैसे चोट लगने के बाद शारीरिक तनाव में मेलेनिन बनना बंद हो सकता है। 
    2. आनुवंशिक परिवर्तन: एक आनुवंशिक उत्परिवर्तन व्यक्ति के शरीर के डीएनए में परिवर्तन करके मेलानोसाइट्स के कार्य कर8ने के तरीके को प्रभावित कर सकता है, जिसकी वजह से डेपिगमेंटेशन हो सकता है। 
    3. कुछ पराबैंगनी विकिरण और जहरीले रासायन के संपर्क में आने से मेलानोसाइट कोशिकाओं के कार्य करने के तरीके पर प्रभाव पड़ सकता है। 

पिगमेंटेशन से बचाव

पिगमेंटेशन से बचाव कुछ हद तक संभव है। हाईपरपिगमेंटेशन को हमेशा रोका नहीं जा सकता है, लेकिन त्वचा को धूप से बचाने में मदद करके, पिगमेंटेशन को रोकने में सहायता मिल सकती है। आइए जानते है कि किन बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  1. हर दिन ठीक प्रकार से सनस्क्रीन का उपयोग किया जाना चाहिए। इसके लिए इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि 30 या 30 से अधिक के एसपीएफ़ वाला "ब्रॉड स्पेक्ट्रम" (जो अल्ट्रावायलेट किरणों, यूवीए और यूवीबी किरणों को ब्लॉक करता है) ही चुना जाए।
  2. दिन मे जिस वक़्त सूरज सबसे ज्यादा गर्मी पर होता है, तब बाहर निकलने से बचे अन्यथा बाहर जाने से पहले सन्स्क्रीन का प्रयोग करें। 
  3. टाइटेनियम डाइऑक्साइड या जिंक ऑक्साइड जैसे भौतिक अवरोधकों का प्रयोग करें।
  4. सुरक्षात्मक कपड़े जैसे पूरी बाजू के शर्ट और पतलून पहने ताकि धूप से बचे रहें। इसके सिवा टोपी पहनें।

हाइपोपिगमेंटेशन प्रकृति में ज्यादातर बिनाइन स्थिति होती है और सही समय पर निदान के बाद शीघ्र उपचार के साथ पुन: त्वचा का रंग प्राप्त किया जा सकता है।

पिगमेंटेशन की जांच

पिगमेंटेशन के कारणो को ध्यान में रखते हुए चिकित्सक इसका  निदान करते है, जिसमे वे मरीज से काफी प्रश्न पूछते हैं और फिर विभिन्न परीक्षण भी कराते हैं। रंजकता का निदान करने के लिए, डॉक्टर निम्नलिखित कदम उठाते हैं:

  1. दृश्य परीक्षा: रंजकता विकारों के निदान में पहला कदम प्रभावित क्षेत्रों की दृश्य परीक्षा है। 
    1. रंग, बनावट, वितरण और रंजकता परिवर्तनों के पैटर्न का आकलन करने के लिए डॉक्टर सावधानीपूर्वक त्वचा, बालों और नाखूनों का निरीक्षण करेंगे। 
    2. प्रभावित क्षेत्रों की अधिक बारीकी से जांच करने के लिए वे विशेष प्रकाश व्यवस्था या आवर्धक उपकरणों का उपयोग कर सकते हैं।
  2. चिकित्सा इतिहास की समीक्षा: डॉक्टर रंजकता विकार में योगदान करने वाले संभावित कारकों की पहचान करने के लिए रोगी के चिकित्सा इतिहास पर चर्चा करेंगे।
  3. लकड़ी का दीपक परीक्षण (Wood lamp examination): कुछ मामलों में, लकड़ी का दीपक परीक्षण किया जा सकता है। 
    1. एक लकड़ी का दीपक एक हाथ में पकड़ने वाला उपकरण है जो पराबैंगनी (यूवी) प्रकाश का उत्सर्जन करता है। 
    2. यह विशिष्ट रंगों या पैटर्नों को उजागर करके कुछ रंजकता विकारों की पहचान करने में मदद करता है जो सामान्य प्रकाश में दिखाई नहीं दे सकते हैं।
  4. बायोप्सी: कुछ स्थितियों में, निदान की पुष्टि करने के लिए त्वचा की बायोप्सी आवश्यक हो सकती है। 
    1. बायोप्सी के दौरान, प्रभावित त्वचा का एक छोटा सा नमूना एकत्र किया जाता है और माइक्रोस्कोप के तहत जांच की जाती है। 
    2. यह प्रक्रिया स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर को रंजकता विकार के अंतर्निहित कारण को निर्धारित करने और अन्य संभावित स्थितियों को बाहर करने की अनुमति देती है।
  5. रक्त परीक्षण: रंजकता विकार के संदिग्ध कारण के आधार पर, रक्त परीक्षण का आदेश दिया जा सकता है। ये परीक्षण कुछ हार्मोन, खनिजों या मार्करों के स्तर का मूल्यांकन करने में मदद कर सकते हैं जो विशिष्ट रंजकता विकारों या प्रणालीगत स्थितियों से जुड़े हो सकते हैं। 

डॉक्टर के परामर्श की तैयारी कैसे करें?

जैसे ही मरीज को तकलीफ शुरू होती है, तभी एक पूर्व नियुक्ति लेकर, ओपीडी पर जाकर, पंजीकरण करवाना चाहिए, और फिर आराम से डॉक्टर से मरीज अपनी सारी तकलीफ का उल्लेख कर सकता है।

डॉक्टर से क्या उम्मीद करें?

  1. सबसे पहले वे मरीज से उनके मेडिकल इतिहास के बारे में पूछेंगे, फिर लक्षणों के बारे में विस्तार से पूछेंगे, जिसमें यह भी शामिल है कि 
    1. डार्क स्किन कब शुरू हुई? 
    2. क्या यह अचानक विकसित हुआ?
    3. क्या यह खराब हो रहा है? और अगर हो रहा तो कितनी तेजी से ऐसा हो रहा है? 
    4. क्या यह शरीर के अन्य भागों में फैल गया है?
    5. मरीज कौन-कौन सी दवाएं लेता रहा हैं या हाल ही में ले रहा है?
    6. क्या मरीज के परिवार में किसी और को भी ऐसी ही समस्या है?
    7. मरीज कितनी बार धूप में जाता हैं? क्या वह सन लैंप का इस्तेमाल करते हैं या टैनिंग सैलून में जाते हैं?
    8. मरीज के अन्य लक्षण क्या है?
  2. त्वचा को अच्छी तरह देखने के लिए चिकित्सक एक शारीरिक परीक्षा करेंगे।
  3. एक विशेष पराबैंगनी (यु वि )प्रकाश के तहत वुड लैंप से त्वचा की जांच की जाती है।
  4. रक्त परीक्षण: इस परीक्षण से पता लगाया जाता है कि किसी भी तत्व जैसे  विटामिन, हार्मोन और आयरन की मात्रा में कोई बदलाव है या नहीं है, साथ ही थायरॉइड फ़ंक्शन की जांच करवाया जाती है। 
  5. त्वचा बायोप्सी।

आपको डॉक्टर से क्या सवाल पूछने चाहिए?

रोगी डॉक्टर से निम्नलिखित प्रश्न पूछ सकता है:

  1. रंजकता क्या है?
  2. रंजकता कौन विकसित कर सकता है?
  3. पिग्मेंटेशन का क्या कारण बनता है?
  4. रंजकता का निदान कैसे किया जाता है?
  5. चेहरे के पिग्मेंटेशन (face pigmentation meaning in hindi) के क्या कारण हैं?
  6. त्वचा रंजकता (skin pigmentation meaning in hindi) का क्या अर्थ है?
  7. पिग्मेंटेशन का इलाज कैसे किया जाता है?
  8. कोई व्यक्ति रंजकता को कैसे रोक सकता है?
  9. क्या कोई घर पर पिगमेंटेशन का इलाज कर सकता है?

पिगमेंटेशन का इलाज

पिगमेंटेशन या हाईपरपिगमेंटेशन के इलाज उसके कारणों के आधार पर किया जाता है । स्वास्थ्य सेवा प्रदाता कुछ दवाइयों, जीवनशैली में बदलाव और अन्य उपचार का सुझाव दे सकता है:

जीवन शैली में बदलाव रोकथाम के साथ उपचार को भी सफल बनाने मे मदद करते हैं। 

  1. सीधी धूप से बचना, सनस्क्रीन का उपयोग करके और सुरक्षात्मक कपड़े पहनकर धूप से होने वाली त्वचा की क्षति से बचना।
  2. अगर कोई दवा पिगमेंटेशन की वजह है, तो उसे रोका जा सकता है। 
  3. रक्त परीक्षण मे अगर विटामिन की कमी सामने आई है तो डॉक्टर की निगरानी में विटामिन लेना शुरू किया जा सकता है।

इसके अलावा डॉक्टर त्वचा पर इस्तेमाल करने के लिए क्रीम या मलहम दे सकते है जैसे कि एज़ेलिक एसिड, कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स, ग्लाइकोलिक एसिड (अल्फा-हाइड्रॉक्सी एसिड), हाइड्रो कुइनोन, कोजिक एसिड (एक तरह का रसायन जो शरीर द्वारा उत्पादित मेलेनिन की मात्रा को कम कर सकता है), सेलिसईलिक ऐसिड, त्वचा ब्लीच, टरेटेनॉइन, और विटामिन सी या बी3 (नियासिनमाइड) क्रीम।

इसके अलावा डॉक्टर मरीज़ को अन्य उपचारों का भी सुझाव दे सकते हैं जिनमे शामिल हो सकते हैं:

  1. रासायनिक पीलस: रासायनिक घोल का उपयोग त्वचा की उन परतों को हटाने के लिए किया जाता है जो नीचे की अधिक युवा त्वचा को प्रकट करती हैं।
  2. क्रायोथेरेपी: क्रायोथेरेपी एक उपचार है जहां डॉक्टर असामान्य ऊतक को जमने और नष्ट करने के लिए अत्यधिक ठंड लगाता है।
  3. लेजर त्वचा रीसरफेसीन्ग: लेजर रिसर्फेसिंग पिगमेंटेशन को कम करने के लिए लेजर का उपयोग करता है।
  4. पिग्मेंटेड लिसन के लिए लेजर उपचार: लेजर त्वचा पर विभिन्न प्रकार के पिग्मेंटेड घावों का इलाज करने के लिए प्रयोग किया जाता है। 

बाजार में मिलने वाले बहुत सारे उत्पाद हाईपरपिगमेंटेशन को कम करने का दावा करते हैं। परंतु इस पर ज्यादा शोध की जरूरत है, इसलिए कौन सा उत्पाद किस के लिए प्रभावी और सही हैं, यह जानने के लिए बेहद जरूरी है कि इस विषय मे मरीज़ अपने डॉक्टर से विस्तार मे बात करें।

ध्यान दें, उपचार का दृष्टिकोण और प्रक्रियाओं का चयन रोगी की स्वास्थ्य स्थिति और उनके इलाज करने वाले डॉक्टर की राय पर निर्भर करता है।

रंजकता की जटिलताए

वैसे तो पिगमेंटेशन इतना गंभीर चिंता का विषय नहीं होता है, अगर ठीक समय पर इसका इलाज नहीं कराया जाए तो यह स्थायी हो सकता है और मनोवैज्ञानिक तनाव पैदा कर सकता है।

यहाँ रंजकता विकारों से जुड़ी कुछ संभावित जटिलताएँ हैं:

  1. मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक प्रभाव: रंजकता और उपस्थिति में महत्वपूर्ण परिवर्तन से आत्म-चेतना, कम आत्म-सम्मान और जीवन की गुणवत्ता में कमी हो सकती है।
  2. सूर्य की संवेदनशीलता और सूर्य की क्षति का बढ़ता जोखिम: रंजकता विकार त्वचा को धूप के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकते हैं। अत्यधिक धूप के संपर्क में आने से रंजकता की अनियमितताएं बिगड़ सकती हैं और त्वचा को और अधिक नुकसान हो सकता है ।
  3. माध्यमिक संक्रमण और सूजन: रंजकता विकारों से प्रभावित त्वचा क्षेत्रों में संक्रमण और सूजन होने का खतरा अधिक हो सकता है।
  4. सामाजिक और व्यावसायिक चुनौतियाँ: कुछ मामलों में, रंजकता विकार, विशेष रूप से वे जो चेहरे या हाथों जैसे दृश्य क्षेत्रों को प्रभावित करते हैं, सामाजिक कलंक और भेदभाव को जन्म दे सकते हैं।

डॉक्टर से कब संपर्क करें?

एक व्यक्ति को निम्नलिखित लक्षणों का अनुभव होने पर अपने डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए:

  1. अगर त्वचा मलिनकिरण या हाईपरपिगमेंटेशन बेहद चिंता और तनाव का कारण बन जाता है। 
  2. त्वचा का लगातार, अस्पष्टीकृत काला पड़ना या हल्का होना। 
  3. कोई भी त्वचा का घाव या लिज़्न अगर अपना आकार, रूप या रंग बदलता है, तो यह त्वचा कैंसर का संकेत हो सकता है। 

समय पर इलाज न होने पर खतरा

वैसे तो रंजकता इतना गंभीर चिंता का विषय नहीं होता है लेकिन अगर समय रहते पिग्मेंटेशन का इलाज नहीं किया जाता है, तो यह खराब हो सकता है और इलाज करना और भी मुश्किल हो सकता है।

कुछ रंजकता एक अंतर्निहित चिकित्सा स्थिति का संकेत हो सकती है जिसके लिए उपचार की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, अन्य धब्बे समय के साथ दिखाई दे सकते हैं, खासकर अगर कोई व्यक्ति खुद को सूरज की क्षति से नहीं बचाता है।

रंजकता के लिए आहार

जबकि कोई विशिष्ट आहार नहीं है जो रंजकता को पूरी तरह से रोक सकता है, एक स्वस्थ और संतुलित आहार समग्र त्वचा स्वास्थ्य का समर्थन करने में मदद कर सकता है। यहाँ कुछ आहार युक्तियाँ दी गई हैं जो सहायक हो सकती हैं:

  1. ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थ खाएं: स्वस्थ त्वचा को बनाए रखने के लिए ओमेगा-3 फैटी एसिड महत्वपूर्ण हैं और सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं, जो रंजकता में योगदान कर सकते हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थों में फैटी फिश, नट्स आदि शामिल हैं।
  2. विटामिन सी से भरपूर आहार लें: विटामिन सी त्वचा को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है।
    यह कोलेजन संश्लेषण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, फोटोप्रोटेक्शन प्रदान करता है और मेलेनिन को कम करता है। इसलिए, विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थों में खट्टे फल (संतरा), स्ट्रॉबेरी, ब्रोकली, आलू, ब्रसेल्स स्प्राउट्स आदि शामिल करें।
  3. विटामिन ई से भरपूर आहार लें: विटामिन ई एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो त्वचा को मुक्त कणों से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है। इसलिए ऐसे खाद्य पदार्थ खाएं जो विटामिन ई से भरपूर हों जैसे कि लाल शिमला मिर्च, एवोकाडो, आम, कद्दू, बादाम आदि।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि रंजकता को रोकने या उसका इलाज करने के लिए अकेले आहार पर्याप्त नहीं हो सकता है। धूप से सुरक्षा और त्वचा की उचित देखभाल जैसे अन्य कारक भी महत्वपूर्ण हैं। रंजकता के लिए कोई भी आहार परिवर्तन करने से पहले हमेशा डॉक्टर से परामर्श करें।

निष्कर्ष

कभी-कभी त्वचा द्वारा निर्माण किया गया वर्णक जिसे मेलेनिन कहते है, वह कम मात्रा या अतिरिक्त मात्रा में पैदा होने लगता है, जिसकी वजह से तवचा कि रंगत प्रभावित हो सकती है। यदि अतिरिक्त मात्रा में मेलेनिन का निर्माण होता है तो इससे धब्बे या पैच बन सकते हैं जो आसपास की त्वचा की तुलना में अधिक गहरे दिखाई देते हैं, जिसे हाईपरपिगमेंटेशन कहा जाता है।

हाईपरपिगमेंटेशन मे व्यक्ति आत्म-जागरूक महसूस कर सकता है, लेकिन यह एक सामान्य स्थिति होती है। जीवनशैली में बदलाव और उपचार से काफी मदद मिल सकती हैं।

अगर पिगमेंटेशन कि वजह से आप बहुत चिंतित हैं, और कुछ सवाल परेशान कर रहें हैं, तो देर न करें, आज ही HexaHealth की पर्सनल केयर टीम से संपर्क करें और उचित मार्गदर्शन लें। HexaHealth के विशेषज्ञ आपके सभी प्रश्नों को हल करेंगे। अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारी HexaHealth पर भी जा सकते हैं।

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अधिकतर पूछे जाने वाले सवाल

पिगमेंटेशन को हिन्दी में रंजकता कहते हैं। यह त्वचा का रंग बताता है जो मुख्य तौर पर त्वचा मे मौजूद मेलेनिन नामक वर्णक की मात्रा से निर्धारित होता है।
पिगमेंटेशन का हिन्दी मे अर्थ होता है- त्वचा का रंग। इससे पता चलता है कि त्वचा साँवली है या हल्की/गोरे रंग की है, जो विशेष कोशिकाओ द्वारा निर्मित वर्णक “मेलानिन” की मात्रा पर निर्भर करता है।

मेलेनिन की मात्रा के अनुसार इसे तीन प्रकार मे देखा गया है:

  1. हाईपरपिगमेंटेशन: जिसमे मेलेनिन की असामान्य रूप से अधिक मात्रा हो जाती है। 
  2. हाइपोपिगमेंटेशन: जिसमे मेलेनिन की असामान्य रूप से कम मात्रा होती है। 
  3. रंगहीनता (डिपिगमेंटेशन): इस प्रकार में मेलेनिन पूरी तरह खत्म हो जाता है। 
हाईपरपिगमेंटेशन में मेलेनिन की मात्रा सामान्य से अधिक हो जाती है। अक्सर त्वचा के कुछ क्षेत्र दूसरों की तुलना में गहरे रंग के होते हैं। इन धब्बों को कभी-कभी उम्र के धब्बे, सूरज के धब्बे या यकृत के धब्बे भी कहा जाता है।
हाइपोपिगमेंटेशन मे मेलेनिन की मात्रा सामान्य से कम होती है। त्वचा का रंग सामान्य से हल्का होता है। ऐसे निशान/पैच त्वचा के ऊपर बन जाते है जो आसपास की सामान्य त्वचा की तुलना में कम रंजकता से जुड़े हैं।
त्वचा की सूजन, खासकर जो हाइपरपिग्मेंटेशन त्वचा की क्षति के बाद होती है, जैसे मुँहासे, कट या जलन के बाद होती है, दवाये, और सूरज की धूप से निकली किरने त्वचा पिगमेंटेशन का कारण बन सकती है।
जेनेटिक्स, जैसे अगर परिवार मे अगर किसी को झाईया है तो इसका असर आप पर भी आ सकता है, धूप के संपर्क में आने से और गर्भावस्था के समय मेलास्मा  चेहरे पर पिगमेंटेशन के मुख्य कारणों मे से हैं।
यदि आपका शरीर बहुत अधिक मेलेनिन बनाता है, तो आपकी त्वचा सांवली हो जाती है। जैसे की गर्भावस्था, एडिसन की बीमारी, और सूरज के संपर्क में आने से आपकी त्वचा का रंग गहरा हो सकता है। यदि आपका शरीर बहुत कम मेलेनिन बनाता है, तो आपकी त्वचा हल्की हो जाती है। विटिलिगो एक ऐसी स्थिति है जो हल्की त्वचा के पैच का कारण बनती है।
गर्भावस्था, सूरज के संपर्क में आने, और एडिसन की बीमारी से आपकी त्वचा का रंग गहरा हो सकता है, जो हाईपरपिगमेंटेशन का कारण बनता है। यदि आपका शरीर बहुत कम मेलेनिन बनाता है, तो आपकी त्वचा हल्की हो जाती है। विटिलिगो एक ऐसी स्थिति है जो हल्की त्वचा के पैच का कारण बनती है।
पिगमेंटेशन से बचने के लिए धूप मे बाहर जाने से बचे,  सनस्क्रीन का उपयोग करके और सुरक्षात्मक कपड़े पहनकर धूप से होने वाली त्वचा की क्षति से बचा जा सकता है।
पिगमेंटेशन के इलाज मे त्वचा को हल्का करने के लिए ओवर-द-काउंटर और प्रिस्क्रिप्शन क्रीम उपलब्ध हैं। इसके लिए ट्रेटीनोइन के साथ संयुक्त हाइड्रोक्विनोन क्रीम एक प्रभावी संयोजन है, परंतु बेहतर यही होगा अगर यह क्रीम चिकित्सक कि जांच के बाद इस्तेमाल की जाए ।
पिगमेंटेशन के उपाय में रोकथाम करना जो एक स्वस्थ जीवन शैली के अपनाने से संभव है, जिसमे धूप मे बाहर जाने से बचना, सनस्क्रीन का उपयोग और सुरक्षात्मक कपड़े पहनकर धूप से होने वाली त्वचा की क्षति से बचा जा सकता है।
पिगमेंटेशन के लक्षणों को दूर करने के लिए त्वचा पर इस्तेमाल करने के लिए क्रीम या मलहम इस्तेमाल किए जाते हैं जैसे कि एज़ेलिक एसिड, कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स, ग्लाइकोलिक एसिड (अल्फा-हाइड्रॉक्सी एसिड), हाइड्रो कुइनोन, कोजिक एसिड, सेलिसईलिक ऐसिड, त्वचा ब्लीच, टरेटेनॉइन, और विटामिन सी या बी3 (नियासिनमाइड) क्रीम। लेकिन कोई भी दवाई लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें।
हालांकि ऐसा कोई विशिष्ट आहार नहीं है जो रंजकता को पूरी तरह से रोक सके, तथापि, आप ऐसे खाद्य पदार्थों को शामिल कर सकते हैं जो ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन सी और विटामिन ई से भरपूर हों। विटामिन सी (खट्टे फल, ब्रोकोली, आदि) ओमेगा -3 फैटी एसिड (मछली, नट, आदि), और विटामिन ई (बेल मिर्च, कद्दू, आदि) सहित खाद्य पदार्थ शामिल करें।

सन्दर्भ

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Last Updated on: 4 July 2024

Disclaimer: यहाँ दी गई जानकारी केवल शैक्षणिक और सीखने के उद्देश्य से है। यह हर चिकित्सा स्थिति को कवर नहीं करती है और आपकी व्यक्तिगत स्थिति का विकल्प नहीं हो सकती है। यह जानकारी चिकित्सा सलाह नहीं है, किसी भी स्थिति का निदान करने के लिए नहीं है, और इसे किसी प्रमाणित चिकित्सा या स्वास्थ्य सेवा पेशेवर से बात करने का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

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