पाइल्स, फिशर और फिस्टुला में क्या अंतर है? - जाने पूरा विवरण

क्या आप हर बार मल त्याग करने पर दर्द का अहसास करते हैं और इस वजह से टॉयलट (शौचालय) जाने से डरते हैं ? यह पाइल्स (बवासीर), फिशर या फिस्टुला के कारण हो सकता है क्योंकि ये सभी मलाशय और गुदा को नुकसान पहुंचाकर उसे प्रभावित करते हैं। हालांकि लोगों के बीच पाइल्स, फिशर और फिस्टुला के बीच अंतर को समझने की बेहद कमी है।

एक ऐसी लाइफस्टाइल (जीवनशैली) जिसमें शरीर की मूवमेंट ना के बराबर होती है, इससे आंतों पर खराब असर पड़ता है और इसका नतीजा अक्सर पाइल्स (बवासीर), फिस्टुला और फिशर के तौर पर सामने आता है। भले ही उम्र कुछ भी हो, कई लोगों को इन हालातों का सामना करना पड़ रहा है। आइए अब पाइल्स बनाम फिशर बनाम फिस्टुला के बारे में समझते हैं कि आखिर ये सभी एक दूसरे से कैसे अलग हैं।

पाइल्स क्या है?

दरअसल गुदा नाल में कई अहम नसें होती हैं। पुरानी कब्ज की समस्या, मल त्याग करते समय दबाव, प्रेग्नेंसी (गर्भावस्था) या मोटापे के कारण गुदा में खून के बहाव में रूकावट हो सकती है, जिससे नसों में सूजन हो सकती है। इन सूजनों को पाइल्स या हेमोरॉयड्स कहा जाता है। पाइल्स दो प्रकार के हो सकते हैं:

  1. आंतरिक हेमोरॉयड्स - ये मलाशय के निचले हिस्से में बनते हैं और कभी-कभी ही गुदा से बाहर निकलते हैं। 
  2. बाहरी हेमोरॉयड्स -  ये गुदा के आसपास की त्वचा पर दिखाई देते हैं। अगर बाहरी बवासीर में खून का थक्का बन जाता है, तो गुदा के आसपास एक सख्त गांठ बन जाती है।

मलाशय के निचले हिस्से में दबाव बढ़ जाता है, जिससे पाइल्स (बवासीर) हो सकता है जिसके कारण इन हालातों में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है: 

  1. मल त्याग के दौरान बहुत ज्यादा दबाव
  2. लंबे समय तक टॉयलट में बैठना
  3. लगातार दस्त या कब्ज।
  4. मोटापा
  5. गर्भावस्था
  6. एनल सेक्स (गुदा मैथुन)
  7. कम फाइबर वाला आहार खाना
  8. बार-बार भारी वजन उठाना

फिशर क्या है?

एनल म्यूकोसा में लंबे छेद को एनल फिशर कहा जाता है। क्रोनिक एनल फिशर चार से लेकर आठ सप्ताह से भी ज्यादा समय तक बना रहता है। जब किसी को पुरानी कब्ज होती है तो मल त्याग करना मुश्किल हो जाता है। सख्त मल पास करते समय, गुदा के आसपास की म्यूकस लेयर फट सकती है या फिर उसे नुकसान पहुंच सकता है। वयस्कों की तुलना में बच्चों में एनल फिशर अधिक आम है। गुदा नाल की मांसपेशियों में खून का कम बहाव या क्रोहन रोग (एक बीमारी जो पाचन तंत्र की सूजन और जलन का कारण बनती है) भी वयस्कों में फिशर का कारण बन सकती है। निम्नलिखित दिए गए कारण ट्रॉमा की वजह बन सकते हैं:

  1. कब्ज जो समय के साथ लगातार बनी रहती है
  2. बाथरूम जाने के लिए संघर्ष करना, खासकर अगर मल सख्त या सूखा हो
  3. लगातार दस्त
  4. गुदा में खिंचाव
  5. एनल सेक्स (गुदा मैथुन)
  6. गुदा में विदेशी वस्तुओं का प्रवेश

फिस्टुला क्या है?

मल पदार्थ एनस यानी गुदा में छोटी ग्रंथियों का रास्ता रोक सकता है और इन्फेक्शन (संक्रमण) का कारण बन सकता है। इसका नतीजा एक फोड़ा बनने (मवाद भरा हुआ) के रूप में सामने आता है। अगर फोड़े से मवाद ठीक से नहीं निकलता है, तो एक फिस्टुला (शरीर के दो हिस्सों के बीच एक असामान्य संबंध) बन सकता है। गुदा में बना फोड़ा और बंद हो चुकी गुदा ग्रंथियां एनल फिस्टुला की अहम वजह हैं। इसके अलावा, काफी कम लेकिन बार-बार होने वाली बीमारियां जो एनल फिस्टुला का कारण बन सकती हैं, वे हैं:

  1. ट्रॉमा (आघात)
  2. क्रोहन रोग (आंत की सूजन से संबंधित बीमारी)
  3. यौन संपर्क के कारण होने वाले इन्फेक्शन 
  4. कैंसर यानी कर्क रोग
  5. डायवर्टीकुलिटिस के कारण बड़ी आंत में छोटे पाउच बन जाते हैं और उनमें सूजन आ जाती है
  6. ट्यूबरक्लोसिस यानी क्षय रोग

पाइल्स बनाम फिशर बनाम फिस्टुला

फिशर, पाइल्स और फिस्टुला के रूप में जानी जाने वाली ये तीनों मेडिकल कंडीशन्स पहली नज़र में एक जैसी ही लगती हैं। लेकिन अगर उन्हें करीब से देखा जाए, तो पाइल्स, फिशर और फिस्टुला में काफी फर्क नज़र आता है। पाइल्स, फिस्टुला और फिशर के बीच शुरुआती अंतर निम्नलिखित हैं:

  1. पाइल्स से गुदा नलिका में खून का बहाव बनाए रखने वाली नसें प्रभावित होती हैं।
  2. फिस्टुला, गुदा और उसके आसपास की त्वचा के बीच की वह सुरंग है जो संक्रमित है।
  3. फिशर गुदा ऊतक की परत पर एक दरार होती है जो बहुत दर्दनाक होती है।

आप नीचे दी गई जानकारी की मदद से पाइल्स, फिशर और फिस्टुला में अंतर को समझ सकते हैं:

  1. ज्यादातर पाइल्स में दर्द का एहसास नहीं होता इसलिए इसपर लोगों का ध्यान नहीं जाता। फिशर ज्यादा दर्दनाक होता है। वहीं फिस्टुला, गुदा के रास्ते से मवाद का रिसाव करता है और ये काफी दर्दनाक होता है।
  2. कब्ज के अलावा, आमतौर पर इन तीनों पाइल्स से जुड़े होने का संबंध प्रेग्नेंसी से होता है। फिशर मल और दस्त के दौरान बहुत ज्यादा दबाव के साथ जुड़ा हुआ है। फिस्टुला आमतौर पर क्रोहन रोग, मोटापे और लंबे समय तक बैठे रहने के कारण होता है।
  3. हाई फाइबर युक्त डायट लेने और अधिक तरल पदार्थ पीने से इन तीनों को रोका जा सकता है। इसके अलावा, टॉयलट के दौरान साफ-सफाई का बेहतर तरीके से ध्यान रखके फिस्टुला को रोका जा सकता है।
  4. पाइल्स के इलाज के लिए ओवर-द-काउंटर दवाएं और घरेलू इलाज का इस्तेमाल किया जा सकता है। फिशर के इलाज के लिए लेटरल स्फिंक्टेरोटॉमी सर्जरी और दवा की जरूरत हो सकती है। फिस्टुला का पता लगाना और उसका इलाज करना कहीं ज्यादा मुश्किल है; इससे जुड़ी सही जानकारी जुटाने के लिए लिए मैगनेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) स्कैन या सोनोफिस्टुलाग्राम करना जरूरी हो सकता है। वीडियो-असिस्टेड एनल फिस्टुला उपचार और लेजर सर्जरी जैसे दूसरे तरीकों का इस्तेमाल उनके इलाज के लिए किया जाता है।

पाइल्स, फिशर और फिस्टुला के लक्षण

पाइल्स (बवासीर) मलाशय में खून का बहाव करने वाली वो नसें होती हैं जिनमें सूजन आ जाती हैं, एक फिस्टुला तब होता है जब गुदा के आसपास के क्षेत्र और त्वचा एक अनियमित छेद बन जाता है, और फिस्टुला गुदा की परत में बन जाने वाली वो दरार होती है जो बेहद दर्दनाक होता है। लिहाजा, बवासीर, फिशर और फिस्टुला के सामान्य लक्षण हैं:

पाइल्स

फिशर फिस्टुला

एनस (गुदा) में लाली के साथ दर्द होता है 

गुदा के चारों ओर स्पष्ट तौर पर दिखाई देने वाला छेद गुदा में सूजन के साथ गुदाद्वार में दर्द

मल त्याग करते समय दर्द होना

मलत्याग से पहले और बाद में तेज दर्द मल त्याग करते समय दर्द

म्यूकस निकलने की मौजूदगी

खून से सना हुआ और सख्त मल पस यानी मवाद का निकलना

खून का बहना (अक्सर बिना दर्द के)

एनल (गुदा) क्षेत्र के आसपास फटी त्वचा त्वचा में जलन और त्वचा का लाल होना

कब्ज महसूस होना

छोटी गांठ या त्वचा का टैग एनल (गुदा) क्षेत्र में खराब गंध वाला तरल पदार्थ

एनस (गुदा) के आसपास खुजली

खराब गंध के साथ डिस्चार्ज थकान और बुखार

एनल रीजन यानी गुदा क्षेत्र में कोमलता

एनल (गुदा) क्षेत्र के आसपास खुजली और जलन  मलाशय से खून का बहाव


आपको एनस (गुदा) से खून का बहाव, दर्द या तरल पदार्थ निकलने का एहसास होता है, तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलने की जरूरत है। ये ऐसे मसले हैं जिनकी पहचान करना और उसका इलाज कराना आम तौर पर आसान होता है। इन समस्याओं के इलाज के लिए सर्जरी सहित कई दूसरी प्रक्रियाएं मौजूद हैं।

पाइल्स, फिशर, फिस्टुला के कारण

पाइल्स, फिशर और फिस्टुला एनोरेक्टल डिसऑर्डर हैं। बहुत सारे कारण होते हैं जो इन समस्याओं को जन्म दे सकते हैं। पाइल्स, फिशर और फिस्टुला के बीच फर्क को समझने में मदद करने वाले कुछ फैक्टर्स हैं:

पाइल्स

फिशर फिस्टुला

लंबे समय से कब्ज से पीड़ित

सख्त मल  एनल ग्लैंड (गुदा ग्रंथि) में संक्रमण

मोटापा

सर्जिकल प्रक्रियाएं मलाशय का कैंसर

कम फाइबर वाला डायट लेना

मल्टीपल (एक से ज्यादा) प्रेग्नेंसी क्रोहन रोग

डिहाइड्रेशन

जुलाब का बहुत ज्यादा इस्तेमाल यूरिनरी ट्रैक्ट का इन्फेक्शन

बुढ़ापा या जेनेटिक (आनुवंशिक) मेकअप

सेक्सुअली ट्रांसमिटेड (यौन संचारित) रोग  मलाशय और बड़ी आंत में अल्सर की मौजूदगी

प्रेग्नेंसी

आंतों की सूजन से संबंधित बीमारियां ट्यूबरक्लोसिस (यक्ष्मा)


अगर कोई लक्षण एनल डिसऑर्डर के कारण होता है, तो तुरंत इलाज के लिए कारण जानना और अपने नजदीकी डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

पाइल्स, फिशर और फिस्टुला से जुड़े क्विक फैक्ट्स

पाइल्स, फिशर और फिस्टुला के बारे में कुछ रोचक तथ्य हैं:

  1. 75 प्रतिशत जनसंख्या 50 वर्ष की उम्र तक आते-आते पाइल्स (बवासीर) से प्रभावित होती है।
  2. प्रेग्नेंसी के दौरान पाइल्स (बवासीर) होना सबसे आम है।
  3. एनस (गुदा) कभी-कभी खून के बहाव के कारण बंद हो सकता है जिसका नतीजा बाहरी हेमोरॉयड्स के तौर पर सामने आ सकता है।
  4. दवा और फाइबर से भरपूर आहार की मदद से एक्यूट फिशर का आसानी से इलाज किया जा सकता है।
  5. क्रोनिक फिशर की समस्या बार-बार हो सकती है और इसे कंट्रोल करना चुनौतीपूर्ण होता है।
  6. फिस्टुला मोटापे से जुड़ा हो सकता है और बहुत समय तक बैठे रहने से हो सकता है।
  7. फिस्टुला एक रिसने वाले मवाद से भरे बड़े, दर्दनाक और लाल छेद के रूप में सामने आ सकता है।
  8. फिस्टुला के इलाज के लिए एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल किया जा सकता है।

निष्कर्ष

गुदा नहर बवासीर, फिशर और फिस्टुला से प्रभावित होती है। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि ये सभी मुद्दे एक ही बीमारी से संबंधित नहीं हैं। इन बीमारियों में से प्रत्येक में अलग-अलग उप-स्थान और तीव्रता की डिग्री होती है जो मानव शरीर को प्रभावित करती है। प्रत्येक लक्षण की सावधानीपूर्वक जांच की जानी चाहिए, और यदि आवश्यक हो तो उपचार की मांग की जानी चाहिए। बवासीर, फिशर या फिस्टुला होने पर जल्द से जल्द डॉक्टर से सलाह लें।

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अधिकतर पूछे जाने वाले सवाल

पाइल्स, फिशर और फिस्टुला में क्या अंतर है?

गुदा नलिका में रक्त वाहिकाएं बवासीर से प्रभावित होती हैं। फिस्टुला गुदा और आसपास की त्वचा के बीच की नलिका है जो संक्रमित है। एक फिशर गुदा ऊतक के अस्तर पर एक दर्दनाक दरार है।

क्या फिशर बवासीर में बदल सकता है?

दोनों के लक्षणों में कुछ समानताओं के कारण, गुदा विदर को कभी-कभी रोगी या प्राथमिक देखभाल चिकित्सक द्वारा बवासीर के रूप में गलत समझा जाता है। निदान में यह देरी एक तीव्र विदर को एक पुराने में बदलने का जोखिम उठाती है, जो उपचार को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना देती है।

क्या फिस्टुला एक प्रकार का बवासीर है?

बवासीर में रक्त वाहिकाएं सूज जाती हैं, जबकि फिस्टुला गुदा से आसपास की त्वचा तक के बीच की नलिका है जो संक्रमित है।

कौन सा ज़्यादा बुरा है: फिशर या बवासीर?

एक विदर अनिवार्य रूप से छोटी दरारें होती हैं, जबकि बवासीर मुख्य रूप से बढ़े हुए रक्त वाहिकाओं होते हैं। ज्यादातर समय, बवासीर दर्द रहित और अदृश्य होते हैं। एक दरार काफी दर्दनाक है।

कौन सी ज़्यादा दर्दनाक है; फिस्टुला या फिशर?

फिशर अधिक दर्दनाक है। जब फिस्टुला होता है, तो गुदा क्षेत्र से मवाद निकलता है।

क्या फिशर को फिस्टुला समझने की गलती हो सकती है?

फिशर गुदा की दीवार की त्वचा में एक कट है। इसे फिस्टुला-इन-एनो के लिए भ्रमित किया जा सकता है क्योंकि इसमें त्वचा नालिका का खुलना शामिल है।

पाइल्स क्या है?

पुरानी कब्ज के कारण गुदा या मलाशय क्षेत्र में सूजन वाली नसों को बवासीर कहा जाता है। यह बेचैनी और रक्तस्राव का कारण बनता है।

फिशर क्या है?

गुदा क्षेत्र में एक छोटे से कट को फिशर कहा जाता है। यह कठोर मल के गुजरने के कारण हो सकता है जिससे रक्तस्राव भी हो सकता है।

फिस्टुला रोग क्या है?

फिस्टुला गुदा और आसपास की त्वचा के बीच की नलिका है जो संक्रमित है। यह चोट या संक्रमण के कारण हो सकता है।

एक फिशर फिस्टुला में कैसे बदल जाता है?

ठीक हुई फिशर, एक फिस्टुला में बदल सकती है।

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